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Tuesday, June 10, 2014

Common Sense Can Make You A Millionaire - Management Funda - N Raghuraman - 10th June 2014

कॉमन सेंस भी करोड़पति बना सकता है


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


पोपटराव पवार अब 54 साल के हो चुके हैं। वे अपने गांव में एक समय इकलौते पोस्ट ग्रेजुएट हुआ करते थे। लिहाजा, गांव के युवाओं ने उनसे आग्रह किया कि वे सरपंच का चुनाव लड़ें। लेकिन पवार की इसमें दिलचस्पी नहीं थी। परिवार वाले चाहते थे कि वे शहर जाएं और बढिय़ा-सी नौकरी करें, जबकि पवार क्रिकेटर बनना चाहते थे। खेलते भी अच्छा थे। घर के लोगों को भी लगता था कि वे एक न एक दिन कम से कम रणजी टूर्नामेंट में तो खेल ही लेंगे। 
आखिरकार हुआ क्या? पोपटराव गांव के सरपंच ही बने। सिर्फ यही नहीं, उन्होंने गांव को क्रिकेटरों से ज्यादा दौलतमंद बना दिया। हो सकता है, आपको यकीन न हो, क्योंकि जब आप पवार के गांव का इतिहास खंगालेंगे तो मौजूदा स्थिति पर शक हो सकता है। एक समय महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का हिवड़े बाजार नाम का यह गांव गरीबी से त्रस्त था। लोग भी शराब के लती। और तरह-तरह के अपराध आम। लेकिन अब हालात एकदम उलट हैं। 

Source: Common Sense Can Make You A Millionaire - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 10th June 2014 

Monday, March 3, 2014

If You Want To Know More About A Subject Then Write An Esaay - Management Funda - N Raghuraman - 3rd March 2014

किसी विषय को बेहतर तरीके से जानना चाहते हैं तो निबंध लिखिए


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 



अगर आपसे कोई बांस पर निबंध लिखने को कहे और आप इस चुनौती को स्वीकार करने को तैयार हैं तो यह आर्टिकल न पढ़ें। इसके बजाय पहले अपने विचारों पर आधारित निबंध लिख डालें। फिर इसे पढ़ें। इसके बाद तुलना करें।

बांस विकास का वाहन हो सकता है, क्योंकि हरा-भरा रहना व दृढ़ता इसकी खासियत है। कहा जाता है कि बांस की एक नाल से ही इतनी ऑक्सीजन पैदा होती है, जितनी किसी कोजिंदगी भर काम आ सकती है। दुनियाभर में बांस की करीब 1,750 प्रजातियां बताई जाती हैं। आज भी विश्व की आबादी का पांचवां हिस्सा, बांस का इस्तेमाल कंस्ट्रक्शन के काम में करता है। पूरी दुनिया में 2015 तक बांस का बाजार एक लाख करोड़ का हो जाएगा, ऐसा अनुमान है। भारत दुनिया में बांस का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। चीन का नंबर पहला है। 
 
Source: If You Want To Know More About A Subject Then Write An Esaay - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 3rd March 2014

Tuesday, February 4, 2014

Inability Or Circumstances Cannot Be A Hurdle To Success - Motivation Management Funda - N Raghuraman - 4th February 2014

सफलता में बाधा नहीं बन सकते अक्षमता या हालात


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



अक्षमता की कहानी: 

मध्यप्रदेश के दमोह में रहने वाली सृष्टि तिवारी की आंखों में बचपन से मोतियाबिंद है। उसके 11 ऑपरेशन हो चुके हैं। लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। उल्टा समय के साथ-साथ स्थिति और बिगड़ गई। आज उसकी आंखों में सिर्फ पांच फीसदी ही दृश्यता बची है। यानी वह 95 फीसदी दृष्टिहीन हो चुकी है। लेकिन उसने अपनी इस अक्षमता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रही। कई स्कॉलरशिप व सर्टिफिकेट उसके नाम हो चुके हैं। सृष्टि के मामा और नाना-नानी ने पढ़ाई की तरफ उसके रुझान को नोटिस किया। उसकी हर कदम पर मदद की। उन्होंने उसका आत्मविश्वास बढ़ाया। परीक्षाओं में सहयोग किया। पढ़ाई-लिखाई में जो परेशानियां पेश आईं उनका मुकाबला करना सिखाया। उनसे निकलने का रास्ता दिखाया। कक्षा पांचवीं के बाद से ही वह अपने नाना-नानी वीरेंद्र और सुनीता गंगेले व मामा वीके गंगेले के साथ रह रही है। सृष्टि को बे्रल लिपि भी आती है। इसी की मदद से वह स्कूल में अपने नोट्स तैयार करती है। सृष्टि के मामा ने उसे एक लो-विजन डिवाइस लाकर दी है। ताकि वह किताब-कॉपियों में लिखे हुए को पढ़ सके। लेकिन इसके जरिए भी वह एक घंटे से ज्यादा पढ़ नहीं पाती थी। तब उसके मामा, नाना या नानी उसे नोट्स पढ़कर सुनाते हैं। तब तक जब तक कि उसे पाठ याद न हो जाए। इस तरह उसने रोज चार-पांच घंटे पढ़ाई की। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी की। फिर एक लेखक की मदद से बोर्ड परीक्षा में बैठी। नतीजा ये कि 2013 की एमपीबोर्ड परीक्षा में वह प्रदेश में चौथे स्थान पर रही। 
Source: Inability Or Circumstances Cannot Be A Hurdle To Success - Motivation Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 4th February 2014 

Monday, February 3, 2014

A Question Cannot Be Termed As Wrong - Management Funda - N Raghuraman - 3rd February 2014

किसी सवाल को गलत नहीं कहा जा सकता


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


अर्जुन (नाम बदल दिया गया है क्योंकि वह विकलांग है।) को उस वक्त बहुत दिक्कत होती थी जब टीचर उसे अपने पास बुलाते। उससे कहते कि वह बाकी क्लास को संबोधित करे। उस दौरान वह अपने जूतों के फीते भी ठीक ढंग से नहीं बांध पाता था। सवाल-जवाब के पूरे सेशन में भी उसके सवालों को 'गलत' करार दे दिया जाता। उन्हें सिलेबस से बाहर का माना जाता। लेकिन कुछ टीचर थे जो उसे सवाल पूछने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते। वे मानते थे कि कथित 'गलत सवाल-जवाबों' से भी कई बार शानदार आइडिया मिलते हैं।
  
शायद इसीलिए फाइनल सेमेस्टर में उसने बड़ा बिजनेस आइडिया दिया। उससे टीचर ने उसके बिजनेस प्रोजेक्ट आइिया के बारे में पूछा था। उसने जवाब दिया, 'एक ऐसा जूता डिजाइन करना चाहता हूं, जिसमें फीते बांधने की जरूरत ही न पड़े।' 

Source: A Question Cannot Be Termed As Wrong - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 3rd February 2014

Sunday, February 2, 2014

Cooperation Makes A Child Hero Or A Villain - Management Funda - N Raghuraman - 2nd February 2014

सहयोग बनाता है बच्चे को नायक या खलनायक


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



यह कहानी दो बच्चों की है। इन बच्चों की उम्र 12 वर्ष थी। दोनों की कल्पनाओं में, इच्छाओं में निशानेबाजी तैरती थी। कुछ वक्त बाद एक अपनी जिंदगी को नायक की तरह जीने में कामयाब रहा। उसे गरीबी के बावजूद परिवार का सहयोग मिला। जबकि दूसरे के पास कोई सहयोग नहीं था। सही वक्त पर सही व्यक्ति से मुलाकात होने के बावजूद वह खलनायक बन गया। 

नायक की कहानी: 


मध्यप्रदेश के मऊ में एक गांव है हरसोला। आर्मी फायरिंग रेंज के पास रहने वाली यहां की एक लड़की वैसे तो आम लड़कियों की तरह ही थी। उसके पिता की आमदनी का जरिया आटो रिक्शा था। फायरिंग रेंज में गूंजने वाली गोलियों की तड़तड़ाहट इस लड़की को बड़ा आकर्षित करती थी। उसकी कल्पनाओं में रायफल और उससे निकलती गोलियां ही तैरा करती थी। लेकिन इस लड़की के लिए वहां तक पहुंचा आसान नहीं था। बेटी की इच्छा जानकर पिता ने उसके लिए रास्ता तैयार किया। जब वह सातवीं क्लास में थी तब उसे एक समर कैंप में हिस्सा लेने का मौका मिला। यह कैंप सेना के बच्चों की टीम के लिये आयोजित किया गया था। कैंप में लगाए अचूक निशानों ने इस लड़की को जूनियर शूटिंग टीम में पहुंचा दिया। यहां उसे अपने हुनर को निखारने के लिये एक हफ्ते की ट्रेनिंग मिली। यह कहानी है अपने जूनून को जिंदा रखने वाली निशानेबाज राजकुमारी राठौड़ की। बीते साल अगस्त में राजकुमारी को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह अवॉर्ड सिर्फ खेल नहीं, बल्कि खिलाड़ी की लीडरशिप, स्पोटर्समैन स्प्रिट और अनुशासन जैसी विशेषताओं के लिए दिया जाता है। राठौड़ मप्र की एकमात्र एकेडमी प्लेयर हैं जिन्हें यह अवॉर्ड मिला है। 

Source: Cooperation Makes A Child Hero Or A Villain - Management Funda by N Raghuraman - Dainik Bhaskar 2nd February 2014

Saturday, February 1, 2014

An Idea Which Made Housewives A Business Partner - Motivation Management Funda - N Raghuraman - 1st February 2014

एक आइडिया ने हाउसवाइव्स को बनाया बिजनेस पार्टनर


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



अभी एक दिन पहले ही 30 जनवरी को चेन्नई में एक नया रेस्टोरेंट खुला है। इसका नाम है-पॉप अप। करीब 60 लोग उद्घाटन के दिन यहां जुटे हुए थे। रेस्टोरेंट में पेश व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए। और कमाल की बात ये है कि इस रेस्टोरेंट में कोई भी डिश किसी पेशेवर रसोइए ने नहीं बनाई थी। न ही होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर चुके किसी स्टूडेंट ने। 'होम शेफ गिल्ड' नाम की एक संस्था की सदस्यों ने ये डिशेस तैयार की थीं। इस संस्था की सभी सदस्य हाउसवाइव्स हैं। वे महिलाएं जिन्हें उनके घर या मोहल्ले के बाहर शायद ही कोई जानता हो। 'होम शेफ गिल्ड' बनाने का आइडिया पहली बार केपी बालाकुमार के दिमाग में आया। केपी फूड ब्लॉगर हैं। मूल आइडिया ये था कि घरेलू महिलाओं को एक कॉमन प्लेटफॉर्म मिले। जहां वे अपनी-अपनी पसंदीदा डिशेस की रेसिपी एक-दूसरे के साथ शेयर कर सकें। धीरे-धीरे यह प्लेटफॉर्म एक यूनिट की तरह काम करने लगा। यहां से बेकरी के उत्पाद तैयार किए जाने लगे। बिकने भी लगे। सभी महिला सदस्य एक-दूसरे के लिए छोटी-मोटी इवेंट का आयोजन करने लगीं। यह सिलसिला दो साल चला। 
Source: An Idea Which Made Housewives A Business Partner - Motivation Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 1st February 2014