प्रेम चोपड़ा की पठनीय जीवनी
परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे
राजकपूर पर उनकी पुत्री श्रीमती रितु नंदा ने किताब लिखी, विगत वर्ष राकेश रोशन की बेटी सुनयना ने उन पर किताब लिखी और अब श्रीमती राकिता नंदा ने अपने पिता प्रेम चोपड़ा पर किताब लिखी है। किसी भी फिल्म उद्योग के व्यक्ति पर उनके पुत्रों ने किताबें नहीं लिखी हैं, केवल पिता के यश और धन पर उनका अधिकार रहा है परंतु पुत्रियों के मन में माता-पिता की छवि हमेशा कायम रहती है।
इन तथ्यों के बावजूद पुत्र जन्म के लिए प्रार्थनाएं होती हैं, उपवास किए जाते हैं और वंश की निरंतरता नामक भरम के लिए लाख जतन किए जाते हैं। भला हो पंडित जवाहरलाल नेहरू का जिन्होंने भारी विरोध के बावजूद एक कानून 1956 में बनाया जो पुत्रियों को भी पिता की संपत्ति में समान अधिकार देता है।
इस कानून के विरोधियों ने एक ही स्वर में हजारों सालों की परम्परा की दलील दी थी। दरअसल कठिनाई यह है कि भारत में किसी भी कानून से समाज नहीं सुधरता क्योंकि समाज सुधार की प्रक्रिया दृष्टिकोण में परिवर्तन के आधार पर निर्भर करती है।
Source: Life of Prem Chopra - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 16th April 2014






