Showing posts with label jaiprakash chouksey. Show all posts
Showing posts with label jaiprakash chouksey. Show all posts

Friday, July 4, 2014

Box Office, Election and Family - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 4th July 2014

बॉक्स ऑफिस, चुनाव और परिवार


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


इम्तियाज अली के छोटे भाई आरिफ अली की फिल्म "लेकर हम दीवाना दिल' प्रदर्शित हो रही है जिसके निर्माता सैफ अली खान है गोयाकि उनकी पत्नी करीना कपूर खान भी निर्माता ही हैं और फिल्म का नायक युवा अरमान जैन है जो राजकपूर की बेटी रीया तथा मनोज जैन का पुत्र है। अरमान और आरिफ परिवारवाद नहीं अपने दमखम पर चलेंगे। 

फिल्म में परिवारवाद की भावना है परंतु राजनीति में परिवारवाद को कुछ दलों ने एक गाली में बदल दिया है, जबकि परिवार ही मध्यम वर्ग की रीढ़ की हड्डी रहा है और वैदिक संस्कृत ने अपने उदात स्वभाव के अनुरूप पूरे विश्व को ही एक कुटुंब के रूप में परिभाषित किया था परंतु दुर्भाग्यवश बौने लोगों द्वारा इस संस्कृति की संकीर्ण परिभाषा की गई है, जो इसके राजनीति से जुड़ने के कारण हुई है। 

Source: Box Office, Election and Family - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 4th July 2014 

Thursday, July 3, 2014

Shaadi = Band, Baaja, Baaraat - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 3rd July 2014

शादी = बैंड, बाजा, बारात


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


ऋतिक रोशन के तलाक के बाद करिश्मा कपूर का भी तलाक हो गया है। अमीरों के तलाक से पहले मोटी रकम का आर्थिक लेन-देन होता है और यह राशि कभी उजागर नहीं की जाती। आजकल तो बड़े लोगों के घर में विवाह के पूर्व ही इस तरह का अनुबंध भी किया जाता है कि रिश्ते टूटने पर तलाक के लिए कितनी रकम देनी होगी। 
 
जरा सोचिए कि इस तरह के रिश्तों में कितना विश्वास है कि संबंध बनने से पहले टूटने का मुआवजा तय किया जा रहा है। एक बड़े निर्माण परिवार के छोटे पुत्र का विवाह इसीलिए नहीं हुआ कि कन्या ने इस तरह के अविश्वास से भरे करारनामे पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया। विदेशों में अनेक प्रसिद्ध लोगों का दीवाला ही निकला है तलाक की कीमत चुकाने के कारण। 
 
Source: Shaadi = Band, Baaja, Baaraat -  Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 3rd July 2014

Wednesday, July 2, 2014

Film Stars, Ad Films and Morality - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 2nd July 2014

सितारे, विज्ञापन फिल्में और नैतिकता?

 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


खबर है कि एक तमाखूहीन पान मसाले के विज्ञापन के लिए शाहरुख खान ने 20 करोड़ रुपए का अनुबंध किया है और रणवीर सिंह ने 3 करोड़ रुपए एक कंडोम के विज्ञापन के लिए प्राप्त किए। उधर कंगना रनावत ने एक शादी में नृत्य के लिए तीन करोड़ रुपए के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। 
 
विज्ञापन सितारों की कमाई का ऐसा जरिया है जिसमें उन्हें मात्र एक या दो दिन की शूटिंग करनी पड़ती है और फिल्म के लिए पचास दिन परिश्रम करना पड़ता है। अत: विज्ञापन फिल्मों में अपेक्षाकृत अधिक लाभ है परंतु विज्ञापन फिल्में उसी समय तक मिलती हैं जब तक सितारों की फिल्में लोकप्रिय हैं। 
 
Source: Film Stars, Ad Films and Morality - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 2nd July 2014

Tuesday, July 1, 2014

Film Lyricist Irshad Kamil in "Pehel" - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 1st July 2014

फिल्म शायर इरशाद कामिल 'पहल' में


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

इरशाद कामिल इस समय सिनेमा के सितारे गीतकार हैं और इम्तियाज अली की 'रॉकस्टार' के गीतों ने इस विधा में नए विचार का प्रतिनिधित्व किया। रणबीर कपूर के विलक्षण अभिनय तथा इरशाद के गीतों के कारण यह फिल्म लंबे समय तक याद रहेगी। 

हिन्दुस्तानी सिनेमा में प्रतिभाशाली गीतकारों की लंबी परम्परा रही है जिनमें जोश मलीहाबादी, साहिर लुधियानवी, शैलेंद्र, शकील, मजरूह सुल्तानपुरी, नीरज, हसरत, आनंद बक्षी, इंदीवर, अनजान, प्रदीप, निदा फाजली, नरेंद्र शर्मा, जावेद अख्तर, जांनिसार अख्तर इत्यादि रहे हैं और इसी परम्परा के वर्तमान में इरशाद बढिय़ा काम कर रहे हैं। 


Source:  Film Lyricist Irshad Kamil in "Pehel" - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 1st July 2014

Monday, June 30, 2014

Spiced Up World and "Shimla" in Entertainment World - Parde Ke Peeche -Jaiprakash Chouksey - 30th June 2014

मिर्च संसार और मनोरंजन जगत में 'शिमला'


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

रमेश सिप्पी बरसों बाद फिल्म बना रहे हैं, नाम है 'शिमला मिर्च' और केंद्रीय भूमिका कर रही हैं उनकी प्रिय हेमामालिनी जिसके साथ वे अंदाज, सीता-गीता और शोले बना चुके हैं। फिल्म में युवा नायक राजकुमार गुप्ता भी हैं जिन्हें हाल ही में हंसल मेहता की 'सिटी लाइट्स' में सराहा गया है। युवा नायिका का चयन हो रहा है।

रमेश सिप्पी और हेमा मालिनी 39 वर्ष पश्चात एक फिल्म कर रहे हैं। रमेश सिप्पी निर्माता जीपी सिप्पी के पुत्र हैं और उनकी शम्मी कपूर अभिनीत 'ब्रह्मचारी' में सहायक निर्देशक थे। उन दिनों फ्रांस की फिल्म 'मैन एंड वीमैन' की चर्चा थी जो एक विधुर और विधवा की प्रेम-कथा थी। 

Source: Spiced Up World and "Shimla" in Entertainment World - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 30th June 2014

Saturday, June 28, 2014

Kangna Ranaut's Place in Scriptwriting Department - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 28th June 2014

लेखन विभाग में कंगना का स्थान


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

अमेरिका से पटकथा लिखने का प्रशिक्षण लेकर लौटने के बाद कंगना रनावत न केवल अपनी अभिनीत पटकथाओं में सुझाव देंगी वरन् वे कुछ हिस्से लिखेंगी भी। वह यह भी चाहती हैं कि लेखन विभाग में उनका नाम जाना जरूरी है। सच्चाई यह है कि सारे सितारे पटकथा में परिवर्तन करते हैं, अब कंगना इस खेल में हिस्सा ले रही हैं। 

जब 'दबंग' का प्रदर्शन हो गया तब यूटीवी के शिखर सिद्धार्थ कपूर ने ऋषिकपूर से कहा कि दबंग की पटकथा उनके पास आई भी थी और नीरस फिल्म में पैसा लगाना उन्हें सही नहीं लगा परंतु प्रदर्शित फिल्म 'दबंग' अपनी मूल पटकथा से बहुत अलग है। जाहिर है कि सारे परिवर्तन सलमान और अरबाज ने किए। 

Source: Kangna Ranaut's Place in Scriptwriting Department - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 28th June 2014

Friday, June 27, 2014

Remembering Pancham Da - Rahul Dev Burman - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 27th June 2014

पंचम की याद आती है

 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 



आज पंचम अर्थात राहुल देव बर्मन का 75वां जन्म दिन है और अगर वे जीवित होते तो आज के लोकप्रिय संगीतकार प्रीतम, हिमेश रेशमिया और साजिद-वाजिद से उनकी प्रतिस्पर्धा होती और मजे की बीत यह है कि इन सबके पिता किसी दौर में पंचम और उनके पिता राजकुमार सचिन देव बर्मन के साजिंदा रहे हैं । 
 
गोयाकि मुकाबला अपने अपनों के बीच ही होता। जब पंचम लोकप्रियता के शिखर पर थे तब लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल सिंहासन पर विराजमान थे और इनकी प्रतिद्वंद्विता में लक्ष्मी-प्यारे यह कभी नहीं भूले कि उनकी 'दोस्ती' के गीत में माउथ आर्गन बजाने के लिए श्रेष्ठ पंचम की सेवाएं उन्होंने ली थीं। उस दौर में प्रतिद्वंद्विता सख्त थी परन्तु उसे दुश्मनी माना जाता था और किसी अन्य के श्रेष्ठ काम पर तालियां बजाने में कोई संकोच नहीं किया जाता था।

राजकुमार सचिन देव बर्मन के एकमात्र पुत्र का जन्म नाम राहुल देव रखा गया था परन्तु उस दौर के सुपर सितारा अशोक कुमार ने जब नन्हे बालक को गोद लिया तो वह रोने लगा तब दादा मुनि अशोक कुमार ने सचिनदा से कहा कि यह तो रोता भी पंचम में है, इसे पंचम कहेंगे और स्वयं सचिन दा ने उसे हमेशा पंचम कहकर ही पुकारा। 
 
Source: Remembering Pancham Da - Rahul Dev Burman - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 27th June 2014

Thursday, June 26, 2014

Gold Struck - An Indo-Chinese Film Venture - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 26th June 2014

भारत-चीन सहयोग की फिल्म 'गोल्ड स्ट्रक'


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

सबसे अधिक फिल्म दर्शकों की संख्या भारत और चीन में है। दुनिया के अन्य देशों में सिनेमा दर्शकों की संख्या घट रही है और अमेरिका में बच्चों के कारण विज्ञान फंतासी और कॉमिक्स पर आधारित फिल्में वहां के सिने उद्योग की एकमात्र ताकत है। 
 
क्या कारण है कि भारत और चीन में ही सिने दर्शक बढ़ते जा रहे हैं क्या दोनों पुरानी संस्कृतियों के इतिहास में लंबे सामंतवाद की समानता जन मानस को अलग ढंग से बनाती रही है। भारत और चीन में छोटी सामंतवादी रियासतों के आपसी झगड़ों का लंबा इतिहास रहा है। साथ ही ज्ञान की खोज के लिए भी समान बेकरारी रही है।
 
दोनों ही देशों में पुरानी मान्यताएं और परम्पराएं रही हैं। दोनों देशों के पास किवंदतियां हैं, माइथोलॉजी है और दोनों ही कथा वाचकों और श्रोताओं के मुल्क हैं तथा किस्सागोई की आशनाई वाली प्रवृति उन्हें सिनेमा का दर्शक बनाती हैं। 
 
Source:  Gold Struck - An Indo-Chinese Film Venture - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 26th June 2014

Wednesday, June 25, 2014

Zindagi - New Channel By Zee TV - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 25th June 2014

मनोरंजन जगत में 'जिंदगी' की धड़कन

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


विदेशी सीरियल दिखाने हेतु निर्मित जी का नया चैनल 'जिंदगी' के शुभारंभ पर एक एपिसोड 'काश मैं आपकी बेटी न होती' के एक दृश्य में एक गरीब मां अपने बच्चों से प्रार्थना करती है कि आज की रात उन्हें भूख सहनी होगी क्योंकि घर में सिर्फ एक मुठ्ठी चावल है जो दिन भर मेहनत करने के बाद लौटे पिता को देना है और उन सबको यह अभिनय करना है कि वे पहले ही खा चुके हैं।


पिता के लौटने पर बच्चों ने विश्वसनीय अभिनय किया परंतु पिता का पहला निवाला लेते समय सबसे छोटे बच्चे का मुंह खुला निवाले की उम्मीद में जैसे पहले होता रहा है या कहें कि उसकी अंतडिय़ों में कुलबुलाती भूख ने उससे यह कराया और पिता समझ गया कि सब अभिनय कर रहे हैं। उसने कहा, थोड़ा ही सही परंतु सभी उसे खाएंगे। 


Source: Zindagi - New Channel By Zee TV - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 25th June 2014

Tuesday, June 24, 2014

Star Parivar Awards and Aaamir Khan - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 24th June 2014

पारिवारिकता की शाम पलायन का जाम


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


 
बाइस जून की रात स्टार टेलीविजन ने 'स्टार परिवार' नामक एक उत्सव मनाया जिसमें आमिर खान मुख्य अतिथि थे और उनके कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' की तीसरी किश्त की जानकारी देने के साथ विगत दो किश्तों में उठाए सामाजिक मुद्दों को हल करने की दिशा में क्या प्रयास समाज और सरकार ने किए हैं, आमिर खान ने बताया कि बलात्कार की शिकार महिला से पुलिस की पूछताछ के तरीके सब प्रांतों में अलग रहे हैं और प्राय: तहकीकात के इन तरीकों के कारण पीडि़ता को वही हादसा शब्दों की सतह पर दोबारा झेलना पड़ता रहा है। 

बलात्कारी ने पहले कहां स्पर्श किया और पीडि़ता को कैसा लगा जैसी वाहियात बातें इनमें शामिल रही हैं और सारी प्रक्रिया सत्य को जानने के बदले बचाव पक्ष के लिए वे पतली गलियां खोजना जिसके जरिए वे गुनहगार को बचा सकें। 

बकौल आमिर खान केंद्रीय सरकार ने एक समान और सुसंस्कृत प्रक्रिया को अपनाने की हिदायत प्रांतीय सरकारों को पहले ही दे दी है। अन्य अनेक मुद्दों पर अवाम की प्रतिक्रिया से सरकार को अवगत कराया जा रहा है। 


Source: Star Parivar Awards and Aaamir Khan - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 24th June 2014

Saturday, June 21, 2014

Difference Between Comic and Frenzied Cinema - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 21st June 2014

हास्य एवं पागलपन सिनेमा के भेद


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

साजिद खान और निर्माता वाशू भगनानी की 'हमशक्ल' किशोर कुमार की पागलपन वाली फिल्में जैसे 'हॉफ टिकिट', 'झुमरू' इत्यादि को समर्पित की गई है परंतु किशोर कुमार ने संजीदा 'दूर गगन की छांव' भी बनाई है और सार्वकालिक महान हास्य फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' भी बनाई है। 
 
दरअसल बेसिर-पैर की मखौल उड़ाने वाली फिल्मों की लंबी परम्परा रही है। हास्य फिल्म और पागलपन की फिल्मों में अंतर होता है। हास्य फिल्मों में गंभीर समस्याओं के प्रति चिंता जताई जाती है। 
 
मसलन चार्ली चैपलिन की 'गोल्ड रश' मनुष्य के लालच और अनर्जित सम्पदा के प्रति तीव्र आग्रह को रेखांकित करती है और उसके एक दृश्य में सोने की तलाश में निर्जन बर्फीले स्थान पर भूखा फंसा चैपलिन जूतों को उबालकर उससे कीले निकालकर ऐसे खाता है मानो हड्डी निकालकर मांस खा रहा हो। 
 
 
Source: Difference Between Comic and Frenzied Cinema - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 21st June 2014

Friday, June 20, 2014

Amazing Colors of Creative World - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 20th June 2014

सृजन संसार का अजब-गजब रंग


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

जानी मेरा नाम' और 'गीता मेरा नाम' जैसी सफल फिल्मों के लेखक के.आर. नारायण 'गाइड' के लेखक आर.के. नारायण के भाई नहीं हैं। बहरहाल के.आर. के लिखने का ढंग अजीब था। वे मुंबई से मद्रास और मद्रास से मुंबई की गाड़ी में फस्र्ट क्लास का एक केबिन बुक करते थे जिसमें अपने सहायक और एक चाकर के साथ सफर के दरमियान पटकथा लिखते थे। इस यात्रा के एक सप्ताह में पटकथा कमोबेश पूरी हो जाती थी। संभवत: उन्हें चलती रेलगाड़ी की रिदम प्रेरणा देती थी। वे बड़े स्टेशनों के प्लेटफार्म पर चहल-कदमी भी करते थे, शायद आम आदमी में अपने किरदार खोजते थे। 

लेखकों के लिखने और संगीतकारों के माधुर्य रचने के तौर तरीके अजीब होते हैं। बिस्मिला खान साहेब बाबा विश्वनाथ के आंगन में सुर साधना करते थे। सृजनकार कोई खास टेबल, पेन या कागज पर ही लिख सकते हैं। कुछ लोग पहाड़ों पर जाते हैं, कुछ के लिए कोई शहर प्रेरणादायक होता है। 



Source: Amazing Colors of Creative World - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 20th June 2014
 

Thursday, June 19, 2014

Humshakal, Humsafar, Humzaad - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 19th June 2014

हमशक्ल, हमसफर, हमजाद


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

साजिद खान की 'हमशकल्स' नामक फिल्म प्रदर्शित हो रही है जिसमें तीन पात्रों के दो-दो हमशक्ल हैं गोयाकि नौ प्रमुख भूमिकाएं हैं तो यकीनन आधा दर्जन नायिकाएं और खलनायक भी होंगे अर्थात भरी-पूरी फिल्म है। सिनेमा में दो हमशक्ल पात्रों की फिल्में दुनिया भर के देशों में बनाई गई। अमिताभ बच्चन ने 'महान' नामक फिल्म में तीन पात्र अभिनीत किए थे और संजीव कुमार ने एक फिल्म में नौ पात्र अभिनीत किए थे। 

दो हमशक्ल भाइयों पर अनेक फिल्में बनीं हैं और कथा के इस ढांचे की प्रथम फिल्म तथा किताब 'इम्पॉस्टर' थी जिसमें एक अंग्रेज का हमशक्ल जर्मन है जिसे जासूसी के लिए अंग्रेज बताकर लंदन भेजा जाएगा और आखरी रात अंग्रेज ने जर्मन हमशक्ल को मार दिया और उसके लंदन पहुंचने के पहले जर्मन अफसर अपने लंदन में सक्रिय जासूसों को खबर कर चुके हैं और अंग्रेज गुप्तचर संस्था के पास खबर है कि स्वयं को अंग्रेज बताने वाले जर्मन हमशक्ल हैं। 


Source: Humshakal, Humsafar, Humzaad - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 19th June 2014 
 

Wednesday, June 18, 2014

Preity Zinta's Attack and Retreat - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 18th June 2014

प्रीति जिंटा का 'आक्रमण' और 'रीट्रीट'


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

व्यक्तिगत रिश्तों की गोपनीय बातों को सनसनीखेज बनाने का मौका मीडिया को मिल ही जाता है। प्रसिद्ध और धनाड्य लोगों के व्यक्तिगत जीवन में सूक्ष्मतम छिद्र भी मिल जाए तो मीडिया का हाथी उसमें से निकल जाता है। प्रीति जिंटा ने तो एक खिड़की ही खोल दी। 

नेस वाडिया और प्रीति जिंटा लंबे समय तक अंतरंग मित्र रहे हैं फिर रिश्तों में दरार आई परंतु आइपीएल तमाशे की पंजाब टीम में 25 प्रतिशत नेस वाडिया के पास है और 23 प्रतिशत प्रीति के पास है, इसलिए इस तमाशे के दरमियान मुलाकात होती रही है और एक दिन उनके बीच तकरार हुई परंतु घटना के बहुत दिनों बाद प्रीति को जाने कैसे ख्याल आया कि पुलिस में शिकायत दर्ज की जाए। उनका कहना है कि यह रिपोर्ट उन्होंने भविष्य में अपनी सुरक्षा की खातिर की है और वे किसी को मुलजिम करार करके दंड नहीं देना चाहतीं। 


 Source: Preity Zinta's Attack and Retreat - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 18th June 2014

Tuesday, June 17, 2014

Gulzar, Satyajit Ray and Children Films - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 17th June 2014

गुलजार, सत्यजीत रॉय और बाल फिल्में


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


गुलजार का लिखा नाटक पंद्रह जून को मुंबई के पृथ्वी थियेटर में मंचित हुआ जिसे देखने का अवसर नहीं मिला। यह नाटक सत्यजीत रॉय की 1969 में प्रदर्शित संगीतमय फिल्म 'गोपी गायेन बाघा बाएन' से प्रेरित है।

ज्ञातव्य है कि सत्यजीत रॉय ने यह फिल्म अपनेे दादा उपेंद्र किशोर राय चौधरी महोदय की कथा से प्रेरित होकर बनाई थी। इस परिवार की तीन पीढिय़ां बच्चों के लिए साहित्य रचती रही हैं।

गुलजार भी बच्चों के वार्षिक मेले में जाते रहे हैं और उन्होंने बच्चों के लिए एक फिल्म 'किताब' भी रची थी। गुलजार के व्यक्तित्व और सिनेमा में बंगाल का प्रभाव हमेशा रहा है। उन्होंने विमलराय के सहायक के रूप में कॅरिअर प्रारंभ किया था और उन्हें 'बंदिनी' में एक गीत लिखने का अवसर भी मिला।

ऋषिकेश मुखर्जी की अनेक फिल्में उन्होंने लिखी हैं और बतौर निर्देशक भी उनकी पहली फिल्म 'मेरे अपने' बंगाली फिल्म 'अपन जन' से प्रेरित थी। उनकी पत्नी भी बंगाली राखी हैं।


Source: Gulzar, Satyajit Ray and Children Films - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 17th June 2014

Friday, June 13, 2014

Mahesh Bhatt - Ruminating Memories - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 13th June 2014

महेश भट्ट यादों की जुगाली के दौर में


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे



कुछ दिन पूर्व महेश भट्ट की हंसल मेहता निर्देशित 'सिटी लाइट्स' का प्रदर्शन हुआ। यह फिल्म ब्रिटिश-फिलीपेनो सहयोग से बनी ''मनीला मेट्रो'' से प्रेरित थी और बाकायदा अधिकार खरीद कर बनाई गई है। इसका नायक अपने परिवार सहित रोजी रोटी की तलाश में राजस्थान से मुंबई आता है और उन्हें अनेक कष्ट झेलने पड़ते हैं। 

मुंबई में घर का सपना अनेक धूर्त व्यापारी दशकों से बेच रहे हैं और राजकपूर की श्री 420 में भी यह समस्या प्रस्तुत हुई थी। राजकपूर की आवारा, श्री 420 और 'जागते रहो' के नायक गांवों से रोजी रोटी की तलाश में महानगर आते हैं जो अपनी निर्मम चक्की में उनके सपने, शरीर और आत्मा पीस देता है। 


 Source: Mahesh Bhatt  - Ruminating Memories - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 13th June 2014

Thursday, June 12, 2014

Fun n Frolic at Educational Campuses - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 12th June 2014

शिक्षा परिसर की मौजमस्ती

 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


नए चमकीले भारत में होने वाले परिवर्तन और आबादी के चालीस प्रतिशत युवा लोगों को समझने में कुछ हद तक सहायता स्कूल एवं कॉलेज के परिसर में होने वाली हलचल से मालूम की जा सकती है। विगत दो दशकों से कॉलेज कैम्पस अनेक फिल्मों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, परंतु फिल्मों में प्रस्तुत परिसर यथार्थ से कोसों दूर उसी वृहत फंतासी का हिस्सा है जिससे आज खूब बेचा जा रहा है। 

करण जौहर को यह खुशफहमी है कि उनकी फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द इयर' एक महान फिल्म है और युवा अवचेतन का प्रतिनिधित्व करती है। इस फिल्म में दिखाए शिक्षा संस्थान जैसा कोई भव्य परिसर विश्व के किसी भी शिक्षा संस्थान का नहीं हो सकता। भव्यता को जौहर महानता समझते हैं और उनका मानस तथा सिनेमा में भव्यता के प्रति घोर सम्मान मूर्ख बालक की जिद की तरह है। उनकी फिल्म में एक भी दृश्य कक्षा का नहीं है। 


Source:  Fun n Frolic at Educational Campuses - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 12th June 2014

Wednesday, June 11, 2014

Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 11th June 2014

बाल कलाकारों का यथार्थ जीवन


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


आउटलुक की फिल्म समीक्षक डोला मित्रा ने कौशिक गांगोली की फिल्म 'अपुर पांचाली' पर अत्यंत सारगर्भित लेख लिखा है जो मिथ बनाम सत्य के गहरे पक्ष को प्रस्तुत करता है। ऑस्कर जीतने वाली 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में जिन बच्चों ने शूटिंग की थी, आज वे कहां हैं और विश्व प्रसिद्धि की लाइम लाइट हटने के बाद उन्होंने यथार्थ जीवन का किस तरह मुकाबला किया, क्योंकि एक बार प्रसिद्ध होने के बाद साधारण जीवन ढोना अत्यंत कठिन हो सकता है। 

चार्ली चैपलिन की 'द किड' के बच्चे का भी शेष जीवन कठिनाइयों में बीता। राजकपूर की 'बूट पॉलिश' की बेबी नाज और रतन कुमार को भी ताउम्र संघर्ष करना पड़ा क्योंकि लाइम लाइट फिर लौटकर नहीं आई। इसी तरह बचपन में बहादुरी के कार्य करके राष्ट्रपति से पुरस्कार होने वाले बच्चे भी 'पल दो पल के शायर' होते है और बाद में गुमनामी के अंधेरे उन्हें लील लेते हैं। 

Source: Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 11th June 2014

Tuesday, June 10, 2014

Shahrukh Khan's Dimple and Tears of People - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 10th June 2014

शाहरुख खान के डिम्पल और अवाम के आंसू

 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

क हास्य कार्यक्रम में दर्शकों के बीच से एक युवती मंच पर आकर अपने जीवन के सबसे बड़े सपने अर्थात शाहरुख खान के गालों पर बने डिम्पल को छूना चाहती है और सकुचाए से शाहरुख खान यह करने देते हैं और कहते हैं कि कभी कहीं किसी ने डिम्पल में जमा दूध पीने की इच्छा भी जताई थी।। प्राय: इस तरह प्रायोजित तमाशे में दर्शकों के बीच संयोजक द्वारा बैठाए गए सवैतनिक जूनियर कलाकार भी होते हैं और पहले से रिहर्सल की गई इच्छाओं, स्वप्नों की बात करते हैं और तमाशा जम जाता है। 

अगर ऐसा ही कुछ दशकों पूर्व चार्ली चैपलिन या राजकपूर के साथ होता तो वे कहते कि इन डिम्पल में ठहरे उनके आंसू की बात करें। हर काल खंड की संवेदनाएं और प्राथमिकता अलग-अलग होती है और दर्शक का अवचेतन भी बदलता रहता है। चार्ली चैपलिन ने कहा था कि उनका मनपसंद मौसम बरसात है क्योंकि सड़क पर भीगते हुए चलते समय आपके आंसू कोई देख नहीं पाता गोयाकि बरसात अभावों का नकाब भी होती है जैसे कई बार कोट केवल फटी कमीज को छुपाने के लिए पहनी जाती है और ढीली पतलून का पांयचा जूतों के सुराख छुपाता है। 


Source: Shahrukh Khan's Dimple and Tears of People - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 10th June 2014

Tuesday, April 15, 2014

Shuddhi vs Bajirao Mastani - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 15th April 2014

शुद्धि बनाम बाजीराव मस्तानी


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


स समय शायद हर क्षेत्र में छाया युद्ध लड़े जा रहे हैं और खूंखार लोग चीखते-चिंघाड़ते एक दूसरे पर आक्रमण करने की मुद्रा में नृत्य कर रहे हैं, जिसे आप 'डांस ऑफ डेमोके्रसी' कह सकते हैं। फिल्म उद्योग में ऐसा ही एक छाया युद्ध करण जौहर और संजय भंसाली के बीच बताया जा रहा है और मुद्दा है 2015 की क्रिसमस की छुट्टियों में जौहर की 'शुद्धि ' और भंसाली की 'बाजीराव मस्तानी' का प्रदर्शन। 

मजे की बात यह है कि अभी इन फिल्मों की शूटिंग प्रारंभ होना तो दूर की बात कॉस्टिंग भी फाइनल नहीं है। करण के पास संभवत: दीपिका पादुकोण है तो भंसाली के पास रणवीर सिंह है तथा उन्हें उम्मीद है कि दीपिका भी आ जाएगी। ज्ञातव्य है कि ऋतिक रोशन ने 'शुद्धि' छोड़ दी है और करीना हटा दी गई हैं। यह फिल्म उद्योग में नई रीत शुरू हुई हैं कि पहले छुट्टियों वाले सप्ताह को चुन लेते हें और प्रदर्शन तिथि तय करने के बाद बैकवर्ड प्लानिंग करते हैं कि अगर 20 दिसंबर को प्रदर्शन है तो एक दिसंबर को सेंसर कराना है और एक नवंबर से डीआई कराना है। 

Source: Shuddhi vs Bajirao Mastani - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 15th April 2014