अतीत और भविष्य के संबंध अच्छे हों तो वर्तमान बेहतर होगा
मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन
पुणे के तंबात समुदाय से ताल्लुक रखते हैं बालचंद्र काडू। तांबे के बर्तन बनाते हैं। शहर के कस्बा पेठ इलाके में उनकी वर्कशॉप है। वे अपने समुदाय की सातवीं पीढ़ी हैं। करीब 400 साल पहले यह समुदाय पुणे और आस-पास के इलाके में आकर बसा था। पहले यह पेशवा शासकों के लिए हथियार वगैरह बनाता था। अब तांबे के बर्तन, कलाकृतियां बनाकर जीविका चला रहा है। एक साल पहले की बात है। बालचंद्र अपनी वर्कशॉप में तांबे की थाली बना रहे थे। उन्होंने उसे हर तरफ से देखा। सब कुछ ठीक पाकर उन्हें अपने काम पर संतुष्टि और खुशी हुई। लेकिन दुख के दो कारण भी थे। पहला यह कि 14 घंटे आग के सामने बैठकर बनाई शानदार कलाकृति के सिर्फ दो-तीन सौ रुपए ही मिलने थे। दूसरा, उनके बच्चे ने इस काम में हाथ बंटाने से साफ इनकार कर दिया था। उनके लड़के ने ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में करिअर चुना है। यह कहानी सिर्फ बालचंद्र की है, ऐसा नहीं है। पूरे तंबात समुदाय में ऐसे ही किस्से हैं। नई पीढ़ी अपना परंपरागत काम छोड़कर वह करिअर चुन रही है जहां ज्यादा पैसे मिलें।
स्रोत : If Relations Between Past and Future Are Good Then Present Will Be Better - Management Funda By N Raghuraman - दैनिक भास्कर 26th November 2013