पंचम की याद आती है
परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे
आज पंचम अर्थात राहुल देव बर्मन का 75वां जन्म दिन है और अगर वे जीवित होते तो आज के लोकप्रिय संगीतकार प्रीतम, हिमेश रेशमिया और साजिद-वाजिद से उनकी प्रतिस्पर्धा होती और मजे की बीत यह है कि इन सबके पिता किसी दौर में पंचम और उनके पिता राजकुमार सचिन देव बर्मन के साजिंदा रहे हैं ।
गोयाकि मुकाबला अपने अपनों के बीच ही होता। जब पंचम लोकप्रियता के शिखर पर थे तब लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल सिंहासन पर विराजमान थे और इनकी प्रतिद्वंद्विता में लक्ष्मी-प्यारे यह कभी नहीं भूले कि उनकी 'दोस्ती' के गीत में माउथ आर्गन बजाने के लिए श्रेष्ठ पंचम की सेवाएं उन्होंने ली थीं। उस दौर में प्रतिद्वंद्विता सख्त थी परन्तु उसे दुश्मनी माना जाता था और किसी अन्य के श्रेष्ठ काम पर तालियां बजाने में कोई संकोच नहीं किया जाता था।
राजकुमार सचिन देव बर्मन के एकमात्र पुत्र का जन्म नाम राहुल देव रखा गया था परन्तु उस दौर के सुपर सितारा अशोक कुमार ने जब नन्हे बालक को गोद लिया तो वह रोने लगा तब दादा मुनि अशोक कुमार ने सचिनदा से कहा कि यह तो रोता भी पंचम में है, इसे पंचम कहेंगे और स्वयं सचिन दा ने उसे हमेशा पंचम कहकर ही पुकारा।
Source: Remembering Pancham Da - Rahul Dev Burman - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 27th June 2014