सृजन संसार का अजब-गजब रंग
परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे
जानी मेरा नाम' और 'गीता मेरा नाम' जैसी सफल फिल्मों के लेखक के.आर. नारायण 'गाइड' के लेखक आर.के. नारायण के भाई नहीं हैं। बहरहाल के.आर. के लिखने का ढंग अजीब था। वे मुंबई से मद्रास और मद्रास से मुंबई की गाड़ी में फस्र्ट क्लास का एक केबिन बुक करते थे जिसमें अपने सहायक और एक चाकर के साथ सफर के दरमियान पटकथा लिखते थे। इस यात्रा के एक सप्ताह में पटकथा कमोबेश पूरी हो जाती थी। संभवत: उन्हें चलती रेलगाड़ी की रिदम प्रेरणा देती थी। वे बड़े स्टेशनों के प्लेटफार्म पर चहल-कदमी भी करते थे, शायद आम आदमी में अपने किरदार खोजते थे।
लेखकों के लिखने और संगीतकारों के माधुर्य रचने के तौर तरीके अजीब होते हैं। बिस्मिला खान साहेब बाबा विश्वनाथ के आंगन में सुर साधना करते थे। सृजनकार कोई खास टेबल, पेन या कागज पर ही लिख सकते हैं। कुछ लोग पहाड़ों पर जाते हैं, कुछ के लिए कोई शहर प्रेरणादायक होता है।
Source: Amazing Colors of Creative World - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 20th June 2014