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Friday, June 20, 2014

Amazing Colors of Creative World - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 20th June 2014

सृजन संसार का अजब-गजब रंग


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

जानी मेरा नाम' और 'गीता मेरा नाम' जैसी सफल फिल्मों के लेखक के.आर. नारायण 'गाइड' के लेखक आर.के. नारायण के भाई नहीं हैं। बहरहाल के.आर. के लिखने का ढंग अजीब था। वे मुंबई से मद्रास और मद्रास से मुंबई की गाड़ी में फस्र्ट क्लास का एक केबिन बुक करते थे जिसमें अपने सहायक और एक चाकर के साथ सफर के दरमियान पटकथा लिखते थे। इस यात्रा के एक सप्ताह में पटकथा कमोबेश पूरी हो जाती थी। संभवत: उन्हें चलती रेलगाड़ी की रिदम प्रेरणा देती थी। वे बड़े स्टेशनों के प्लेटफार्म पर चहल-कदमी भी करते थे, शायद आम आदमी में अपने किरदार खोजते थे। 

लेखकों के लिखने और संगीतकारों के माधुर्य रचने के तौर तरीके अजीब होते हैं। बिस्मिला खान साहेब बाबा विश्वनाथ के आंगन में सुर साधना करते थे। सृजनकार कोई खास टेबल, पेन या कागज पर ही लिख सकते हैं। कुछ लोग पहाड़ों पर जाते हैं, कुछ के लिए कोई शहर प्रेरणादायक होता है। 



Source: Amazing Colors of Creative World - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 20th June 2014
 

Thursday, June 12, 2014

Fun n Frolic at Educational Campuses - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 12th June 2014

शिक्षा परिसर की मौजमस्ती

 

परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


नए चमकीले भारत में होने वाले परिवर्तन और आबादी के चालीस प्रतिशत युवा लोगों को समझने में कुछ हद तक सहायता स्कूल एवं कॉलेज के परिसर में होने वाली हलचल से मालूम की जा सकती है। विगत दो दशकों से कॉलेज कैम्पस अनेक फिल्मों का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, परंतु फिल्मों में प्रस्तुत परिसर यथार्थ से कोसों दूर उसी वृहत फंतासी का हिस्सा है जिससे आज खूब बेचा जा रहा है। 

करण जौहर को यह खुशफहमी है कि उनकी फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द इयर' एक महान फिल्म है और युवा अवचेतन का प्रतिनिधित्व करती है। इस फिल्म में दिखाए शिक्षा संस्थान जैसा कोई भव्य परिसर विश्व के किसी भी शिक्षा संस्थान का नहीं हो सकता। भव्यता को जौहर महानता समझते हैं और उनका मानस तथा सिनेमा में भव्यता के प्रति घोर सम्मान मूर्ख बालक की जिद की तरह है। उनकी फिल्म में एक भी दृश्य कक्षा का नहीं है। 


Source:  Fun n Frolic at Educational Campuses - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 12th June 2014

Tuesday, April 15, 2014

Shuddhi vs Bajirao Mastani - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 15th April 2014

शुद्धि बनाम बाजीराव मस्तानी


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


स समय शायद हर क्षेत्र में छाया युद्ध लड़े जा रहे हैं और खूंखार लोग चीखते-चिंघाड़ते एक दूसरे पर आक्रमण करने की मुद्रा में नृत्य कर रहे हैं, जिसे आप 'डांस ऑफ डेमोके्रसी' कह सकते हैं। फिल्म उद्योग में ऐसा ही एक छाया युद्ध करण जौहर और संजय भंसाली के बीच बताया जा रहा है और मुद्दा है 2015 की क्रिसमस की छुट्टियों में जौहर की 'शुद्धि ' और भंसाली की 'बाजीराव मस्तानी' का प्रदर्शन। 

मजे की बात यह है कि अभी इन फिल्मों की शूटिंग प्रारंभ होना तो दूर की बात कॉस्टिंग भी फाइनल नहीं है। करण के पास संभवत: दीपिका पादुकोण है तो भंसाली के पास रणवीर सिंह है तथा उन्हें उम्मीद है कि दीपिका भी आ जाएगी। ज्ञातव्य है कि ऋतिक रोशन ने 'शुद्धि' छोड़ दी है और करीना हटा दी गई हैं। यह फिल्म उद्योग में नई रीत शुरू हुई हैं कि पहले छुट्टियों वाले सप्ताह को चुन लेते हें और प्रदर्शन तिथि तय करने के बाद बैकवर्ड प्लानिंग करते हैं कि अगर 20 दिसंबर को प्रदर्शन है तो एक दिसंबर को सेंसर कराना है और एक नवंबर से डीआई कराना है। 

Source: Shuddhi vs Bajirao Mastani - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 15th April 2014