बाल कलाकारों का यथार्थ जीवन
परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे
आउटलुक की फिल्म समीक्षक डोला मित्रा ने कौशिक गांगोली की फिल्म 'अपुर पांचाली' पर अत्यंत सारगर्भित लेख लिखा है जो मिथ बनाम सत्य के गहरे पक्ष को प्रस्तुत करता है। ऑस्कर जीतने वाली 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में जिन बच्चों ने शूटिंग की थी, आज वे कहां हैं और विश्व प्रसिद्धि की लाइम लाइट हटने के बाद उन्होंने यथार्थ जीवन का किस तरह मुकाबला किया, क्योंकि एक बार प्रसिद्ध होने के बाद साधारण जीवन ढोना अत्यंत कठिन हो सकता है।
चार्ली चैपलिन की 'द किड' के बच्चे का भी शेष जीवन कठिनाइयों में बीता। राजकपूर की 'बूट पॉलिश' की बेबी नाज और रतन कुमार को भी ताउम्र संघर्ष करना पड़ा क्योंकि लाइम लाइट फिर लौटकर नहीं आई। इसी तरह बचपन में बहादुरी के कार्य करके राष्ट्रपति से पुरस्कार होने वाले बच्चे भी 'पल दो पल के शायर' होते है और बाद में गुमनामी के अंधेरे उन्हें लील लेते हैं।
Source: Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 11th June 2014