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Tuesday, June 17, 2014

Gulzar, Satyajit Ray and Children Films - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 17th June 2014

गुलजार, सत्यजीत रॉय और बाल फिल्में


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे


गुलजार का लिखा नाटक पंद्रह जून को मुंबई के पृथ्वी थियेटर में मंचित हुआ जिसे देखने का अवसर नहीं मिला। यह नाटक सत्यजीत रॉय की 1969 में प्रदर्शित संगीतमय फिल्म 'गोपी गायेन बाघा बाएन' से प्रेरित है।

ज्ञातव्य है कि सत्यजीत रॉय ने यह फिल्म अपनेे दादा उपेंद्र किशोर राय चौधरी महोदय की कथा से प्रेरित होकर बनाई थी। इस परिवार की तीन पीढिय़ां बच्चों के लिए साहित्य रचती रही हैं।

गुलजार भी बच्चों के वार्षिक मेले में जाते रहे हैं और उन्होंने बच्चों के लिए एक फिल्म 'किताब' भी रची थी। गुलजार के व्यक्तित्व और सिनेमा में बंगाल का प्रभाव हमेशा रहा है। उन्होंने विमलराय के सहायक के रूप में कॅरिअर प्रारंभ किया था और उन्हें 'बंदिनी' में एक गीत लिखने का अवसर भी मिला।

ऋषिकेश मुखर्जी की अनेक फिल्में उन्होंने लिखी हैं और बतौर निर्देशक भी उनकी पहली फिल्म 'मेरे अपने' बंगाली फिल्म 'अपन जन' से प्रेरित थी। उनकी पत्नी भी बंगाली राखी हैं।


Source: Gulzar, Satyajit Ray and Children Films - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 17th June 2014

Wednesday, June 11, 2014

Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 11th June 2014

बाल कलाकारों का यथार्थ जीवन


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


आउटलुक की फिल्म समीक्षक डोला मित्रा ने कौशिक गांगोली की फिल्म 'अपुर पांचाली' पर अत्यंत सारगर्भित लेख लिखा है जो मिथ बनाम सत्य के गहरे पक्ष को प्रस्तुत करता है। ऑस्कर जीतने वाली 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में जिन बच्चों ने शूटिंग की थी, आज वे कहां हैं और विश्व प्रसिद्धि की लाइम लाइट हटने के बाद उन्होंने यथार्थ जीवन का किस तरह मुकाबला किया, क्योंकि एक बार प्रसिद्ध होने के बाद साधारण जीवन ढोना अत्यंत कठिन हो सकता है। 

चार्ली चैपलिन की 'द किड' के बच्चे का भी शेष जीवन कठिनाइयों में बीता। राजकपूर की 'बूट पॉलिश' की बेबी नाज और रतन कुमार को भी ताउम्र संघर्ष करना पड़ा क्योंकि लाइम लाइट फिर लौटकर नहीं आई। इसी तरह बचपन में बहादुरी के कार्य करके राष्ट्रपति से पुरस्कार होने वाले बच्चे भी 'पल दो पल के शायर' होते है और बाद में गुमनामी के अंधेरे उन्हें लील लेते हैं। 

Source: Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 11th June 2014