हास्य एवं पागलपन सिनेमा के भेद
परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे
साजिद खान और निर्माता वाशू भगनानी की 'हमशक्ल' किशोर कुमार की पागलपन वाली फिल्में जैसे 'हॉफ टिकिट', 'झुमरू' इत्यादि को समर्पित की गई है परंतु किशोर कुमार ने संजीदा 'दूर गगन की छांव' भी बनाई है और सार्वकालिक महान हास्य फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' भी बनाई है।
दरअसल बेसिर-पैर की मखौल उड़ाने वाली फिल्मों की लंबी परम्परा रही है। हास्य फिल्म और पागलपन की फिल्मों में अंतर होता है। हास्य फिल्मों में गंभीर समस्याओं के प्रति चिंता जताई जाती है।
मसलन चार्ली चैपलिन की 'गोल्ड रश' मनुष्य के लालच और अनर्जित सम्पदा के प्रति तीव्र आग्रह को रेखांकित करती है और उसके एक दृश्य में सोने की तलाश में निर्जन बर्फीले स्थान पर भूखा फंसा चैपलिन जूतों को उबालकर उससे कीले निकालकर ऐसे खाता है मानो हड्डी निकालकर मांस खा रहा हो।
Source: Difference Between Comic and Frenzied Cinema - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 21st June 2014