Showing posts with label charlie chaplin. Show all posts
Showing posts with label charlie chaplin. Show all posts

Saturday, June 21, 2014

Difference Between Comic and Frenzied Cinema - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 21st June 2014

हास्य एवं पागलपन सिनेमा के भेद


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 

 

साजिद खान और निर्माता वाशू भगनानी की 'हमशक्ल' किशोर कुमार की पागलपन वाली फिल्में जैसे 'हॉफ टिकिट', 'झुमरू' इत्यादि को समर्पित की गई है परंतु किशोर कुमार ने संजीदा 'दूर गगन की छांव' भी बनाई है और सार्वकालिक महान हास्य फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' भी बनाई है। 
 
दरअसल बेसिर-पैर की मखौल उड़ाने वाली फिल्मों की लंबी परम्परा रही है। हास्य फिल्म और पागलपन की फिल्मों में अंतर होता है। हास्य फिल्मों में गंभीर समस्याओं के प्रति चिंता जताई जाती है। 
 
मसलन चार्ली चैपलिन की 'गोल्ड रश' मनुष्य के लालच और अनर्जित सम्पदा के प्रति तीव्र आग्रह को रेखांकित करती है और उसके एक दृश्य में सोने की तलाश में निर्जन बर्फीले स्थान पर भूखा फंसा चैपलिन जूतों को उबालकर उससे कीले निकालकर ऐसे खाता है मानो हड्डी निकालकर मांस खा रहा हो। 
 
 
Source: Difference Between Comic and Frenzied Cinema - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 21st June 2014

Wednesday, June 11, 2014

Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche - Jaiprakash Chouksey - 11th June 2014

बाल कलाकारों का यथार्थ जीवन


परदे के पीछे - जयप्रकाश चौकसे 


आउटलुक की फिल्म समीक्षक डोला मित्रा ने कौशिक गांगोली की फिल्म 'अपुर पांचाली' पर अत्यंत सारगर्भित लेख लिखा है जो मिथ बनाम सत्य के गहरे पक्ष को प्रस्तुत करता है। ऑस्कर जीतने वाली 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में जिन बच्चों ने शूटिंग की थी, आज वे कहां हैं और विश्व प्रसिद्धि की लाइम लाइट हटने के बाद उन्होंने यथार्थ जीवन का किस तरह मुकाबला किया, क्योंकि एक बार प्रसिद्ध होने के बाद साधारण जीवन ढोना अत्यंत कठिन हो सकता है। 

चार्ली चैपलिन की 'द किड' के बच्चे का भी शेष जीवन कठिनाइयों में बीता। राजकपूर की 'बूट पॉलिश' की बेबी नाज और रतन कुमार को भी ताउम्र संघर्ष करना पड़ा क्योंकि लाइम लाइट फिर लौटकर नहीं आई। इसी तरह बचपन में बहादुरी के कार्य करके राष्ट्रपति से पुरस्कार होने वाले बच्चे भी 'पल दो पल के शायर' होते है और बाद में गुमनामी के अंधेरे उन्हें लील लेते हैं। 

Source: Real Lives of Child Artiste - Parde Ke Peeche By Jaiprakash Chouksey - Dainik Bhaskar 11th June 2014

Tuesday, April 15, 2014

You Have To Be Serious To Make People Laugh - Management Funda - N Raghuraman - 15th April 2014

अगर आप हंसाना चाहते हैं तो इस तरफ गंभीर हो जाएं


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


कई लोगों की तरह उसके पिता भी शराब पीने के आदी थे। इससे वह दुखी रहता था, लेकिन दुख किसी पर जाहिर नहीं होने देता। उसके जान-पहचान वाले जब भी मिलते वह उन्हें चुटकुले सुनाता। लोग हंसते और वह भी। महज पांच साल की उम्र से वह चुटकुले सुनाकर लोगों का हंसाने लगा था। यह विधा भी उसके भीतर एक दुर्घटना की वजह से आई। 

एक बार उसकी मां स्टेज पर गा रही थीं। गाते-गाते अचानक उनकी आवाज चली गई। सामने बैठे लोगों ने हल्ला शुरू कर दिया। उन्हें संतुष्ट करने के लिए कार्यक्रम के आयोजकों ने जबरन बच्चे को स्टेज पर धकेल दिया। उसने जैसे-तैसे गाना गया। लेकिन ज्यादा असर नहीं हुआ। सो, उसने कुछ ऐसे कारनामे शुरू कर दिए जिससे लोग हंसने लगे।

इस घटना के बाद उसकी मां की आवाज कभी वापस नहीं आ सकी। इसी बीच शराबी पिता की मौत हो गई। इससे मां की हालात इतनी खराब हो गई कि उन्हें मानसिक अस्पताल तक ले जाना पड़ता था। कुल मिलाकर उस बच्चे का पूरा बचपन इसी तरह की मुश्किलात में बीता। बाद में कॉमेडी और एक्टिंग की मार्फत उसका बहादुर चेहरा दुनिया के सामने था। 

Source: You Have To Be Serious To Make People Laugh - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 15th April 2014