Friday, September 27, 2013

Whatever You Do In Life, Always Give Your 100% - Management Funda - N Raghuraman - 27th Septemebr 2013

जिंदगी में कुछ भी करें उसमें 100 फीसदी दें

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



पहली कहानी : गिरीडीह, झारखंड की राजधानी रांची से करीब 180 किलोमीटर दूर एक कस्बा है। यहां शाम पांच बजे के बाद सभी लोग घरों में बंद हो जाते हैं। एक कप चाय मिलना भी मुश्किल होता है। इस हफ्ते मंगलवार की बात है। नौ साल की पूजा कुमारी स्कूल जा रही थी तो रास्ते में दो लोगों ने उसे अगवा कर लिया। उसका मुंह दबाकर उसे उसके स्कूल बैग सहित एक बोरी में भर दिया। थोड़ी देर बाद बच्ची को लगा कि वह रेलवे स्टेशन में है। जहां वह थी, वहां ट्रेन अनाउंसमेंट सुनाई दे रहा था। अपहरणकर्ता ने जैसे ही बोरी नीचे रखी, पूजा ने अपने पेंसिल बॉक्स से ब्लेड निकाल ली। उस टाट की बोरी को काटा और मदद के लिए जोर से चिल्लाई। पास से पुलिस वाला गुजर रहा था। उसने बच्ची की आवाज सुनी और उसे अपहरण करने वालों के चंगुल से छुड़ा लिया। करीब 45 मिनट तक पूजा उस बोरी में रही और इस दौरान यही सोचती रही कि उसे कैसे बचकर निकलना है।

Source: Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 27th Septemebr 2013


दूसरी कहानी : दक्षिणी दिल्ली के रोहिणी-पीथमपुर इलाके की एक अशिक्षित हाउसवाइफ को अपने पति पर शक था। उसका पति अक्सर रात को देर से आता था। सवाल करती तो वह उसे अजीबो-गरीब तर्क देता। इसी वजह से उसे लगा कि पति का दूसरी महिला के साथ संबंध है। उसने 100 फीसदी ध्यान सिर्फ उस महिला का पता करने में लगाना शुरू कर दिया, जिससे उसके पति के साथ अवैध संबंध हो सकते थे। पिछले हफ्ते जब उसका पति बिजनेस ट्रिप पर शहर से बाहर गया तो उसने एक मैकेनिक की मदद से उसकी कार में जीपीएस डिवाइस लगवा दी। इंस्ट्रूमेंट इस तरह फिट किया कि कार पांच किलोमीटर के दायरे में रहेगी तो उसकी लोकेशन के संबंध में महिला के मोबाइल पर एसएमएस आता रहेगा। पति के बिजनेस ट्रिप से लौटने के बाद तीसरे दिन उस महिला के मोबाइल पर शाम 7.30 बजे एसएमएस आया कि कार पांच किलोमीटर के निर्धारित दायरे से बाहर निकल रही है। महिला ने तुरंत एक ऑटो रिक्शा लिया और निकल पड़ी। एक जगह कार के पार्क होने के सूचना भी उसे एसएमएस के जरिए मिल गई। उस वक्त उसके बेटे भी साथ थे। जैसे ही गाड़ी की सही लोकेशन का उस महिला को पता चला उसने पुलिस को बुला लिया। अपने बेटों और पुलिस के साथ उसने उस मकान में दबिश दे दी जहां पति मौजूद था। पति को उसने रंगे हाथ पकड़ लिया।

तीसरी कहानी : बेंगलुरू के दयानंद सागर इंजीनियरिंग कॉलेज की सातवीं मंजिल से गिरकर 13 अगस्त 2009 को 20 साल के एक छात्र प्रतीक कुमार ठाकुर की मौत हो गई थी। सीआईडी ने जांच के बाद इसे दुर्घटना मानते हुए केस बंद कर दिया। तभी से प्रतीक के पिता मनोज कुमार ठाकुर बेटे की मौत के मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग कर रहे हैं। मनोज रांची, झारखंड में रहते हैं और केस के सिलसिले में तीन साल में कई बार बेंगलुरू आ चुके हैं। आरटीआई के जरिए उन्होंने इस मामले से जुड़े कई दस्तावेज और आंकड़े जुटाए हैं। उन्होंने कन्नड़ भाषा भी सीख ली है। पिछले हफ्ते इस मामले की हाईकोर्ट में पेशी थी। मनोज खुद जस्टिस केएन केशवनारायण की कोर्ट में दलीलें दे रहे थे। उन्होंने उस वक्त कोर्ट में सबको अचरज में डाल दिया जब कन्नड़ भाषा में दस्तावेजों को भी धाराप्रवाह पढ़ डाला। उसमें बताए गए तथ्यों को सबके सामने रखा। मनोज के वकील ने इस मामले से हाथ खींच लिए थे। तब उन्होंने खुद पैरवी करने का फैसला किया। हाईकोर्ट में अब 30 सितंबर को इस केस की अगली सुनवाई है।

फंडा यह है कि..


अगर आप 100 फीसदी योगदान देते हैं तो कोई भी स्थिति आपकी पहुंच से बाहर नहीं हो सकती। ऐसे में न तो आपकी शिक्षा ज्यादा मायने रखती है और न ही अनुभव। 
























Source: Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 27th Septemebr 2013