Sunday, March 9, 2014

Your Creativity Should Touch The Hearts, Not Out of The Heart - Management Funda - N Raghuraman - 9th March 2014

आपकी क्रिएटिविटी दिल में उतरनी चाहिए, दिल से उतरनी नहीं चाहिए


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन

 

शब्दों का जादूगर :

आठ मार्च 1921 के दिन को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इसी दिन मशहूर शायर अब्दुल हई का भी जन्म हुआ था। प्रकृति के साथ स्त्री व पुरुष के प्यार को बेहद खूबसूरती के साथ जोडऩा उनकी खासियत थी। उनकी कलम से निकले अल्फाजों का एक उदाहरण ये है कि


पेड़ों की शाखों पे सोई-सोई चांदनी,
तेरी ख्यालों में खोई-खोई चांदनी,
और थोड़ी देर में थक के लौट जाएगी,
रात ये बहार की फिर कभी न आएगी,
दो एक पल और है ये समां,
सुन जा दिल की दास्तां.


अपनी कलम से निकले शब्दों से उन्होंने एक सरगम की एक अनोखी दुनिया बुनी। इन्हीं शब्दों ने सदाबहार गीतों का रूप लिया। ऊपरी दी गई पंक्तियां 'जाल' फिल्म की हैं। हुई साहब ने बाद में अपना तखल्लुस (पेन नेम) साहिर रख लिया। जिसका मतलब होता है 'जादूगर'। शब्दों के इस जादूगर को दुनिया साहिर लुधियानवी के नाम से जानती है। अपनी कृतियों में साहिर साहब ने प्रकृति को शामिल किया। उन्होंने प्यार की भावनाओं को ऐसी अभिव्यक्ति दी जो सदा के लिए अमर हो गई। 
 
Source: Your Creativity Should Touch The Hearts, Not Out of The Heart - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 9th March 2014 
50 से 70 के दशक तक हिंदी फिल्मों में उनके शब्दों की गूंज सुनाई दी। उनका लिखा एक गाना 'कभी-कभी' आज भी कई लोगों के जेहन में ताजा होगा। उनके नगमों से सजी कई फिल्मों में प्यासा, हम दोनों और वक्त शामिल हैं। उनकी नज्मों के कैनवास पर हमेशा एक आनंद झलका करता था। हालांकि असल वक्त ने उन्हें 25 अक्टूबर 1980 को हमारी दुनिया से बहुत दूर कर दिया। लेकिन आज भी उनके सदाबहार नगमे उन्हें हमारे बीच में जिंदा रखे हुए हैं।

सदाबहार संगीतकार: 

तीन साल की उम्र में कोलकाता के एक बच्चे ने तबला बजाना शुरू कर दिया था। पारिवारिक पृष्ठभूमि में भी संगीत शामिल था। लता मंगेशकर इस परिवार की अच्छी दोस्त हुआ करती थीं। लता जी ने पहली बार कोलकाता के ईडन गार्डन में आयोजित एक संगीत समारोह में इस बच्चे को तबला बजाते देखा था। 11 साल की उम्र में इस बच्चे ने संगीत की धुनें लिखनी शुरू कर दी थीं। बचपन में कई बार यह बच्चा तस्वीरों में लता जी की गोद में बैठा नजर आया। तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक दिन यही बच्चा लता जी के लिए संगीत तैयार करेगा। 
 
चार साल की उम्र में इस बच्चे को पहला पुरस्कार मिला। अब ये संख्या 300 तक पहुंच गई है। इतना ही 1985 में 35 फिल्मों के 180 गाने को संगीत देने के लिए इनके नाम को लिम्का बुक ऑफ रिकॉड्र्स में भी दर्ज किया गया है। 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत देने ये संगीतकार 80 के दशक के सबसे ज्यादा कमाई वाले संगीतकारों में शुमार थे। यहां बात हो रही है भारत में डिस्को के क्रेज को पैदा करने वाले 61 साल के बप्पी लाहिड़ी की। 
 
कई तरह का संगीत देने वाले बप्पी लाहिड़ी को डिस्को किंग के तौर पर ज्यादा जाना जाता है। लोग उनकी तरफ उसी तरह खिंचे चले आते हैं, जैसे लोहे के टुकड़े चुंबक की तरफ खिंचते हैं।

90 के दशक की शुरूआत में जन्मे लोग और उस दौर में पब और डिस्कोथेक में जाने वाले लोग बप्पी को ज्यादा बेहतर जानते हैं। इसकी वजह बप्पी का चमकीला गेटअप या स्टाइल नहीं बल्कि उनका वो संगीत है, जो हर शाम को खुशनुमा और ऊर्जा से भरपूर बना दिया करता था। 
 
उनकी दूसरी फिल्म में ही तब के चार मशहूर गायकों, मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, आशा भोंसले और लता मंगेशकर ने उनके लिए गाने गाए थे। उनके दो गाने दशकों बाद भी उतने ही तरोताजा और मशहूर हैं। इनमें फिल्म 'आप की खातिर' का 'बंबई से आया मेरा दोस्त' और फिल्म 'चलते-चलते' का टाइटल गीत शामिल है।

यहां तक कि माइकल जैक्सन जब 90 के दशक में मुंबई यात्रा पर आए तो उन्होंने भी फिल्म 'डिस्को डांसर' में बप्पी लाहिड़ी की कम्पोजिशन 'जिमी जिमी आ जा आ जा' को अपनी आवाज दी थी।

फंडा यह है कि... 

आप चाहे किसी भी दौर में जन्मे हों, आपकी क्रिएटिविटी ऐसी हो जो दिल में उतर जाए, न कि दिल से उतर जाए। 

 

Management Funda - N Raghuraman


































Source: Your Creativity Should Touch The Hearts, Not Out of The Heart - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 9th March 2014