Thursday, March 6, 2014

Life is God's Gift, Love It ! Management Funda - N Raghuraman - 6th March 2014

जिंदगी ईश्वर का तोहफा है, इसे प्यार करें


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन

 
54 साल की डियाने फ्रीथ ब्रिटेन की सबसे सफल इकोनॉमिक्स की टीचर थीं। उनके पति की मृत्यु कैंसर से हुई थी। फिटनेस के प्रति बेहद सजग रहने वाली फ्रीथ रोज 10 किमी वॉक करती थी। रिटायरमेंट के बाद उनकी योजना दुनिया घूमने की थी, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ उनके पावों में कुछ तकलीफ उभर आई। पहले उनको लगा कि वॉक के दौरान हल्की चोट लगी होगी। फिर ऑर्थराइटिस के प्रति अपनी चिंता के कारण वह चेक-अप के लिए गईं। उन्हें चेस्ट इंफेक्शन की शिकायत भी थीं। 
 
शुरू में एंटीबायोटिक्स से फायदा न होने पर डॉक्टर ने उनको एक्स-रे कराने की सलाह दी। जांच में ऑर्थराइटिस तो नहीं निकला, लेकिन उनके बाएं फेफड़े में एक गांठ मिली। रिपोर्ट आने के बाद वहां पर किसी ने कैंसर शब्द का इस्तेमाल नहीं किया, जबकि जांच से इसकी पुष्टि हो चुकी थी। उन्हें थर्ड स्टेज का फेफड़ों का कैंसर था। जब डॉक्टर ने उन्हें फोन से इस बारे में बताया और सर्जन से मिलने की सलाह दी तो वे एकदम टूट गईं। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। 
 
Source: Life is God's Gift, Love It ! Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 6th March 2014
जब उन्हें बताया गया कि अगले पांच सालों में उनके बचने के चांस सिर्फ 20 फीसदी ही हैं, तो उनके मुंह से निकल पड़ा 'मैं ही क्यों' ? मैंने कभी सिगरेट नहीं पी। मैं हमेशा सेहतमंद रही। इसके बाद वेस्ट मिडलैंड के न्यू क्रॉस अस्पताल में उनका ऑपरेशन हुआ। उनके फेफड़ों से 16 गांठें निकाली गईं। कुछ हफ्तों बाद ही वे फिर से 16 किमी तक वॉक करने लायक हो गईं। कैंसर का पता चलने के बाद भी फ्रीथ ने हार नहीं मानी। उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात बैठी हुई थी। मुझे ठीक होना है और अंत तक कैंसर से लड़ाई लडऩी है। फ्रीथ ने अपनी जिंदगी को कैंसर के कारण रुकने नहीं दिया। ताजी हवा और लंबी वॉक उनकी सबसे बड़ी दवाईयों में शुमार थी। इलाज के तीन महीने बाद वे फिर चेक-अप के लिए गईं। उन्हें बताया गया कि बचने के चांस 50-50 हैं।

इस बात का पता चलने पर उन्हें महसूस हुआ कि उनके पास कैंसर को हराने का मौका है। छह महीने बाद वो फिर चेकअप के लिए गईं। इस दौरान उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। उन्हें अच्छी खबर की उम्मीद थी, लेकिन डॉक्टर ने बताया कि उनका कैंसर लीवर और पेट तक फैल चुका है। और उनके पास सिर्फ छह महीने ही बचे हैं। इसके लिए भी उन्हें कीमोथैरेपी का सहारा लेना होगा। एक बार फिर फ्रीथ की आखों से आंसु झर-झर बह रहे थे। उन्होंने सिसकते हुए एक सवाल पूछा कि मेरे बचने के 50 पर्सेंट चांस का क्या हुआ? डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि कभी-कभी कैंसर शरीर में बिना किसी चेतावनी के बहुत तेजी से फैलता है।

अब फ्रीथ को मालूम था कि वे जिंदगी के किस मोड़ पर खड़ी हैं। फ्रीथ ने अगले छह महीने की योजना बनाई। इसमें अपने बेटे के साथ छुट्टियां बिताना, भलाई के कामों में भागीदारी करना शामिल था। इसके लिए उन्होंने एक बाइक खरीदी और चैरिटी के कामों में जुट गईं। इस तरह 10 महीने गुजर गए। डॉक्टरों की दी छह माह की डेडलाइन कहीं पीछे छूट गई थी। उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के बाद दी जाने वाले डिनर के बजाए एक लाइफ पार्टी प्लान की। इसमें शामिल होने वाले मेहमानों की सूची बड़ी लंबी थी। 
 
पार्टी में डीजे और हर तरह के लजीज खाने का भी इंतजाम था। इस पार्टी में ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्होंने 1978 के बाद से फ्रीथ को नहीं देखा था। अपनी स्पीच में फ्रीथ ने कहा कि मैं कैंसर के साथ जी रही हूं। कैंसर की वजह से मर नहीं रही हूं। मेरे इस सोच से यहां मौजूद कोई एक शख्स भी अपनी जिंदगी में बदलाव ला सके, जिंदगी को मौत से बढ़कर देख सके तो मुझे लगेगा कि इस पार्टी को देने का मकसद पूरा हुआ। मैंने कैंसर के कारण अपनी जिंदगी को थमने नहीं दिया। जिंदगी को ऐसे भी जिया जा सकता है। उनकी इन बातों से कई आंखों में आंसु छलक आए। हर कोई जिंदगी के प्रति उनके प्यार को देखकर हैरान और भावुक हो गया था।

फंडा यह है कि...

जिन्दगी भगवान का तोहफा है और तोहफे से हर किसी के जीवन में खुशियां आती हैं। इसलिए कभी भी खुुशियों को इस तोहफे से दूर नहीं रखना चाहिए। 

 

Management Funda - N Raghuraman

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 Source: Life is God's Gift, Love It ! Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 6th March 2014