Sunday, June 29, 2014

Inspiring and Motivating Story of Rajinder Patil - Street Food Vendor - Management Funda - N Raghuraman - 29th June 2014

This inspirational and Motivational story is right from the heart of N Raghuraman who in his column Management Funda which appears daily in Dainik Bhaskar - A leading Hindi Daily. 

In his column he inspires and motivates by telling us the success story of Rajinder Patil, a street food vendor from Nasik,  Maharashtra, who with his sheer hard work, multi-linguistic abilities, pleasant behavior and innovation in his food vending style has made him a well known person. Rajinder's ability to speak in not so fluent English has also made him a hit among the college youths. 

Rajinder Patil sells Pav Bhaji in his hand cart, but with changing times he has modified his hand cart into an automobile food vending cart which allows people to eat around it. The automobile food vending cart also has folding chairs, so that his customers can sit and enjoy his tasty Pav Bhaji.

The response is so overwhelming that now Rajinder Patil has created an App which actually lets his customers know the details of his location of vending Pav Bhaji. It is upto the customers to visit the location where he is vending or wait for him to come to their location. He's become the favorite of young generation to use smartphone for his business. 

The moral of this truly inspiring and motivating success story is that if you are doing a business which is common such as street food vending than you have to be different from others. This could only be achieved if you recognize your strength and Talent.      

 

साधारण व्यवसाय में आपकी अलग पहचान ही आपको आगे बढ़ाती है


मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 

 

स्ट्रीट फूड व्यापार में ज्यादा बदलाव नहीं होते लेकिन वड़ा, वड़ा पाव, पाव भाजी या कुरकुरा डोसा जैसे विभिन्न प्रकार के व्यंजन पेटू लोगों के लिए बेहद लुभावने होते हैं। उच्च श्रेणी के उपभोक्ता नकली रंगीन लाइटों, अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना की फिल्मों 'दीवार' और 'दुश्मन' के पोस्टर लगे हुए रेस्टोरेंट को वरीयता देते हैं।

इनमें से एक समूह पूरी तरह से सड़क किनारे स्थित स्टॉलों पर निर्भर है तो दूसरा जिनके लिए कीमत मायने रखती है। भीड़ में मौजूद पेटू लोगों को आकर्षित करने वाले पावभाजी जैसे साधारण व्यंजनों के लिए स्टॉल मालिकों को विभिन्न प्रकार की अलग चीजें करनी पड़ती हैं। 

Source: Inspiring and Motivating Story of Rajinder Patil - Street Food Vendor - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 29th June 2014


पिछले हफ्ते मैं अपने मराठी अखबार 'दिव्य मराठी' की तीसरी वर्षगांठ पर नासिक गया था। मैंने देखा वहां कुछ स्ट्रीट वेंडर्स अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए नए-नए बदलाव कर रहे हैं। मैंने एक चौराहे पर 'टेस्टी भाजी पाव' नामक चौपहिया वाहन देखा। 

इसमें लोगों को अपने स्टॉल के बारे में जानकारी देने के लिए अपना ईमेल और फेसबुक आईडी, patilrajender@gmail.com, www.facebook.com/rajenderpbpatil.patil लिख रखा था। इस स्टॉल को राजेंदर पाटिल चलाते हैं। वे मनमाड जिले से आए हैं और सिर्फ दसवीं पास हैं। वे अपना व्यवसाय और लोगों की तरह ही चला रहे थे। शाम को स्टॉल खोलते थे और रात 11 बजे तक बंद कर देते थे। 

उनका साधारण रवैया और अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान लोगों को आकर्षित करता है। हालांकि उनकी इंग्लिश टूटी-फूटी है लेकिन इसके बावजूद कई बार तो कॉलेज के लड़के-लड़कियां उन्हें अपने कैंपस में स्टॉल लगाने के लिए बुलाते हैं।

यहां सीखने वाला पहला मंत्र ये है कि अगर आपको अपना व्यवसाय अच्छा चलाना है तो लोकेशन बेस्ट होनी चाहिए। उन्हें पैसों की तंगी की वजह से अच्छी लोकेशन नहीं मिली इसलिए वे घूमते रहे। हमेशा नए-नए बेस्ट लोकेशन पर रुकते रहे। 

हाथ गाड़ी खींचते-खींचते हाथों में दिक्कत हो गई। फिर वे ज्यादा बेस्ट लोकेशन तक नहीं जा पाते थे। जेब में मात्र 56 हजार रुपए इंवेस्टमेंट के लिए थे। उन्हें अपनी हाथ गाड़ी को ऑटोमोबाइल बनाने के लिए लोन चाहिए था। बस, फिर क्या था एक बैंक उनकी मदद को आगे आया। उन्होंने अपने हाथ गाड़ी को मॉडीफाई करवा कर ऑटोमोबाइल बना दिया।

उन्होंने ऐसी गाड़ी बनाई जिसपर लोग चारों तरफ बैठकर खाना खा सकते हैं। वैन से ही जुड़े हुए फोल्डेबल स्टूल लगे हैं। ये पीने के लिए सिर्फ पैक्ड पानी की बोतलें ही ऑफर करते हैं। अब वे जिले में होने वाली प्रदर्शनियों में जाते हैं। उनके ग्राहकों की संख्या भी बढ़ गई है। कुछ तो स्थाई हैं क्योंकि वे घूम-घूम कर खाने-पीने का सामान बेच रहे हैं।

अब उन्होंने ऐसा एप बनाया है जिसकी मदद से लोग शहर में उनके स्टॉल के लोकेशन का पता कर सकते हैं। अब उपभोक्ता या तो उनके स्टॉल पर आएं या फिर अपने इलाके में आने का इंतजार करें। वे मोबाइल का उपयोग करने वाले यंग जेनरेशन के फेवरेट बन गए हैं।  


फंडा यह है कि...

अगर आप एक जैसा व्यवसाय करने वालों में शामिल हैं तो आप को अपनी अलग पहचान बनानी पड़ेगी। उसके लिए अपनी ताकत या गुण को पहचानें। 

 

Management Funda - N Raghuraman

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Source: Inspiring and Motivating Story of Rajinder Patil - Street Food Vendor - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 29th June 2014