Saturday, October 26, 2013

Hire Specialists To Get Desired Results - Management Funda - N Raghuraman - 26th October 2013

नतीजे उम्मीद से ज्यादा चाहिए तो विशेषज्ञों की भर्ती करें

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 

 

चेन्नई में त्यागराज नगर या टी. नगर भीड़भाड़ वाला इलाका है। इंस्पेक्टर रामा दुरई जानते हैं कि नीला शर्ट पहना व्यक्ति उठाईगिरा है। किसी की भी बेशकीमती वस्तु उड़ा सकता है। वह मोबाइल पर संदिग्ध का हुलिया सादी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों को देते हैं। ताकि दूरी रखते हुए उसका पीछा किया जा सकें। जैसे ही संदिग्ध अपने मिशन में सफल होता है, तीन मिनट के भीतर पकड़ा जाता है। पुलिस उसे और उसके शिकार को भीड़ से अलग ले जाकर कानूनी कार्यवाही शुरू कर देती है। एक ओर शिकायत दर्ज हो रही है। वहीं दूसरी ओर रामा दुरई एक ट्रैफिक पुलिस कॉन्स्टेबल को निर्देश दे रहे हैं। उपनगर के भीड़भाड़ वाले रंगनाथन स्ट्रीट पर एक परिवार हो-हल्ला कर रहा है। उसे शांत किया जाए। 
 Source: Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 26th October 2013

उसी समय रामा दुरई की टीम का सदस्य एक अन्य ट्रैफिक कांस्टेबल को उस्मान रोड पर ट्रैफिक में बाधा बने ऑटो रिक्शा को हटाने को कहता है। ऐसा कोई काम नहीं है, जिसे रामा दुरई और उनकी टीम के तीन सदस्य नहीं करते। यह टीम नॉर्थ उस्मान रोड फ्लाईओवर के नीचे बने एक छोटे से कमरे में काम करती है। क्लोज सर्किट टीवी की मदद से बाजार पर दीवाली की शॉपिंग करने उमड़ी भीड़ पर नजर रखती है। टी नगर में त्योहार के समय उमड़ी भीड़ को काबू करना पुलिस के लिए हमेशा से मुश्किल रहा है। इसलिए इस साल इसमें टेक्नोलॉजी की मदद ली जा रही है। ताकि लोगों को परेशानी न हो। अपराध भी रोके जा सके। यदि उन्हें किसी खास इलाके में भीड़ को निर्देश देने हैं तो टीम का एक सदस्य वॉचटावर से संपर्क करता है। वहां से स्पीकर पर अनाउंसमेंट होता है। यह कंट्रोल रूम बाजार की हर गतिविधि पर नजर रखता है। चार पुलिसकर्मी सुबह 8.30 से रात 11.30 बजे तक दो बड़ी स्क्रीन पर नजर रखते हैं।

उन पर 16 कैमरों से लाइव फीड आता है। यह टीम 5 वॉचटॉवर और 200 बीट पुलिसकर्मियों से संपर्क में रहती है। हालांकि, कैमरे 24 घंटे काम करते हैं। ताकि रात में भी कोई चोरी की वारदात न हो जाए। व्यापारियों की मदद से पुलिस ने 10 महीने पहले 16 सीसीटीवी लगवाए थे। इस पर 12 लाख रुपए खर्च आया था। कैमरे लगने और सतत निगरानी से अपराधों में 70 प्रतिशत तक की कमी आई है। कैमरों के साथ चेहरा पहचानने वाला सॉफ्टवेयर लैस है। इससे पुलिस ज्यादातर पीड़ितों को नाम
और नंबर नोट करने के बाद जाने देती है। कंप्यूटर नेटवर्क में अपराधियों के फोटो फीड है। यदि कैमरा किसी वांटेड व्यक्ति को देखता है तो सॉफ्टवेयर उसे पहचान लेता है। पुलिस लाइव वीडियो में जूम-इन कर गाड़ी का नंबर दर्ज कर सकती है। किसी व्यक्ति का पीछा करवा सकती है या किसी विक्रेता की गतिविधि पर नजर रख सकती
है।

ट्रेनिंग के लिए विशेषज्ञों को बुलाया गया था। जो तिरुपति और सबरीमाला जैसे धार्मिक स्थलों पर भीड़ का प्रबंधन करते हैं। उन्होंने शहर के पुलिसकर्मियों को भीड़ प्रबंधन के तरीके और कैमरे के जरिए अपराध और अपराधियों को पकड़ने के गुर सिखाए। दुनिया में आज हर चीज के एक्सपर्ट है। दाईं आंख और बाईं आंख या दाईं नाक और बाईं नाक के भी मेडिकल एक्सपर्ट हैं। ऐसे में अपराध पर काबू करने और अपराध स्थल की पहचान करने के क्षेत्र में भी विशेषज्ञ उभर रहे हैं।

फंडा यह है कि..

यदि आप नतीजे चाहते हैं तो उस खास क्षेत्र के विशेषज्ञों की सेवाएं लें। परिणाम हमेशा उम्मीद से बेहतर मिलेगा।


















Source: Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 26th October 2013