Saturday, November 16, 2013

A Leader Never Succumbs To Pressure From People - Management Funda - N Raghuraman - 16th November 2013

नेता कभी जनता के दबाव में नहीं आता

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


हर एक व्यक्ति मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम के पहले दिन के 90 मिनट और दूसरे दिन के 120 मिनट को संजोकर रखना चाहेगा। गुरुवार को कमेंट्री बॉक्स में ब्रायन लारा, शेन वार्न, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, सुनील गावसकर, आमिर खान थे। एक साथ। नाइकी से खास तौर पर ‘सचिन रमेश तेंडुलकर 200वां टेस्ट’ लिखी टी-शर्ट्स तैयार करवाई गई। टॉस के लिए इस्तेमाल किए गए सोने के सिक्के पर एक ओर बीसीसीआई का लोगो था। दूसरी ओर सचिन का चेहरा। स्टेडियम की गैलरी में बैठे दर्शक प्रार्थना कर रहे थे कि सचिन 101वां शतक जरूर बनाएं। 

Source: A Leader Never Succumbs To Pressure From People - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 16th November 2013
इससे पहले सचिन जब स्ट्राइक लेने पहुंचे तो वेस्टइंडीज की टीम ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सचिन ने गार्ड लेने से पहले वानखेड़े के पिच को सलाम किया। प्रेसिडेंट्स गैलरी में बैठी अपनी मां रजनी का आशीर्वाद लेने के लिए बैट ऊपर उठाया। रजनी पहली बार अपने बेटे को स्टेडियम से खेलते हुए देख रही थीं। वहीं यह सचिन का आखिरी मैच है। उनके गुरु रमाकांत आचरेकर व्हील चेयर से दर्शक दीर्घा में पहुंचे थे। जब सचिन ने अपने आखिरी मैच में 50 रन पूरे किए तो पूरा स्टेडियम गरज उठा। जब 74 रन पर वह आउट हुए तो पूरे स्टेडियम में मातमी शांति छा गई। कुछ ही सेकंड में दर्शक संभले और खड़े रहकर सचिन को स्टैंडिंग ओवेशन दिया। बॉलीवुड स्टार आमिर खान और उनकी पत्नी किरण राव ने तालियों की गड़गड़ाहट की शुरुआत की। शुरुआत में जो लोग उनके शतक की प्रार्थना कर रहे थे, उन्हें अब कोई शिकायत नहीं है। कई तो आश्वस्त हैं कि यह टेस्ट मैच तीन दिन में खत्म हो जाएगा।

सचिन जब वे 74 रन पर आउट हुए तो स्टेडियम दूसरी दिशा में सोचने लगा था। सब उम्मीद कर रहे थे कि भारत 325 रन के अंदर ऑल आउट हो जाए। इसके बाद वेस्टइंडीज 150 रन के आसपास का लक्ष्य भारतीय टीम के सामने रखे। ताकि सचिन फिर से बल्लेबाजी करने आए और शतक जमाएं। दूसरे दिन लंच के समय भारत वेस्टइंडीज से 100 रन आगे था। एक युवा दर्शक ने अपने कागज पर लिख रखा था कि ‘सचिन के लिए अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है।’ कुछ मिनटों के लिए मुझे समझ ही नहीं आया कि मैं कहां हूं। खेल के मैदान में या पूजास्थल पर। जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ा प्रार्थनाएं बदल रही थीं। यह पहले से तय था कि जो कप्तान टॉस जीतेगा, सोने का सिक्का उसे मिलेगा। धोनी ने टॉस के साथ-साथ सिक्का भी जीता। लेकिन टॉस जीतने के बाद उन्होंने क्या किया, यह सचिन फीवर में दबकर रह गया। पूरा स्टेडियम चाह रहा था कि स्टार बल्लेबाज को पहले बल्लेबाजी का मौका मिले। लेकिन धोनी नई गेंद के गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी को ताजा विकेट पर इस्तेमाल करना चाहते थे। उन्होंने पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। लाखों सचिन प्रशंसक निराश हो गए। धोनी जानते थे कि पहले दिन के मुकाबले दूसरा दिन बल्लेबाजी के लिए बेहतर रहेगा। उम्मीद के अनुरूप दोनों गेंदबाजों ने सीम का बेहतरीन इस्तेमाल किया। बल्लेबाज को अंदर आती और बाहर जाती गेंदों से परेशान किया। शमी को जिस तरह की उछाल और दिशा मिल रही थी, उससे धोनी को चार स्लिप और एक गली लगाने का विश्वास मिला। इस तरह का फील्ड प्लेसमेंट भारतीय विकेट पर कभी सुना ही नहीं गया। अंत में वेस्टइंडीज की पूरी टीम पैवेलियन लौट गई। भारतीय क्रिकेट के भगवान को 90 मिनट बल्लेबाजी का मौका मिला। लेकिन धोनी पर सचिन फीवर हावी नहीं था। लाखों लोग सचिन को खेलते देखना चाहते थे। लेकिन उन्होंने वही फैसला लिया जो टीम, उनके देश और जीत के लिए जरूरी था।


फंडा यह है कि..

कोई भी नेता अपनी कंपनी या अपने देश या अपनी व्यापारिक सफलता के दौरान कभी भी किसी दबाव में नहीं आता।



































Source: A Leader Never Succumbs To Pressure From People - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 16th November 2013