Sunday, November 24, 2013

For Being Gentleman Goodness Is Necessary - Management Funda - N Raghuraman - 24th November 2013

जेंटलमैन होने के लिए जरूरी है शिष्टता 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन  

नॉर्वे के 23 वर्षीय मैग्नस कार्लसन ने इसी शुक्रवार शतरंज की विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीत लिया। उन्होंने विश्वनाथन आनंद को हराया। जो 2007 से 2013 तक छह साल तक विश्व चैम्पियन रहे।

मैग्नस कार्लसन कम्प्यूटर्स के खिलाफ खेलने को महत्व नहीं देते। कई महान खिलाडिय़ों को लगता है कि कम्प्यूटर्स से खेलना उचित नहीं है। इसकी वजह है- कम्प्यूटर का न थकना। इस वजह से वह गलतियां नहीं करता। निरंतर रूप से प्रोसेसिंग पावर और मेमोरी का इस्तेमाल अपनी चालों में करता है, जबकि मनुष्य में दिमाग को एकाग्र रखने की सीमा होती है। उसके बाद वह थकता है। गलतियां भी करता है। यह एक आसान तरकीब है, लेकिन शतरंज में नई है। इसी रणनीति का इस्तेमाल कार्लसन ने भारतीय वर्ल्ड 
चैम्पियन के खिलाफ किया। गेम को लंबा खींचने की कोशिश की। आनंद के दिमाग को थका दिया। इससे वे गलतियां करने को मजबूर हुए। 

स्रोत:  For Being Gentleman Goodness Is Necessary - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 24th November 2013 

कार्लसन आसानी से विचलित नहीं होते। यह क्षमता उनकी उम्र से मेल नहीं खाती। लेकिन इस वजह से उनका खेल मनोवैज्ञानिक नजरिये से ज्यादा प्रभावी भी हो जाता है। वह प्रतिद्वंद्वी को जल्दबाजी में गलती करने को मजबूर करते हैं। कार्लसन जब 15 साल के हुए थे, तब वह 10 हजार घंटों का शतरंज खेल चुके थे। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में खेलने के लिए वे एक वर्ष में 200 दिन सिर्फ यात्राएं करते हैं। इससे 64 वर्गों के खेल में वे मजबूत ही हुए हैं। वह अपने इंट्यूशन के लिए जाने जाते हैं। उसी की बदौलत एक के बाद एक गेम जीतते भी हैं। कार्लसन की ओर दुनिया का ध्यान उस समय गया, जब उन्होंने आनंद के लिए चुनौती बनने की आखिरी बाधा पार की। ऐसा इसलिए कि इससे पहले विश्व चैम्पियनशिप खिताब के लिए जिन भी लोगों में मुकाबला हुआ, उन्हें कम से कम 20 साल शतरंज खेलने का अनुभव था। विशेषज्ञ पूर्वानुमान नहीं लगा सके, क्योंकि कई फैक्टर्स परखे नहीं गए थे। लोगों ने सोचा कि आनंद का अनुभव युवा कार्लसन की स्ट्रीट फाइट अप्रोच पर हावी रहेगा। सामान्यतया शिष्टता और हार अच्छे दोस्त नहीं होते। विंबलडन के महान खिलाड़ी जॉन मैकनरो से लेकर विराट कोहली जैसे युवा क्रिकेटर तक, कोई भी हार पर शिष्टता को जीतने नहीं देता। लेकिन आनंद ने हार पर शिष्टता को हावी नहीं होने दिया। आनंद एक युवा खिलाड़ी से विश्व चैम्पियनशिप का खिताब हारे तो उन्होंने संयम नहीं खोया। 10वें गेम की 65वीं चाल के बाद दोनों ड्रॉ पर सहमत हुए। इस दौरान आनंद ने शिष्टता के साथ कार्लसन से हाथ मिलाया। फिर कांच के घेरे से बाहर निकलकर अपनी पत्नी अरुणा की ओर बढ़ गए। शायद यह बताने कि अब वे विश्व चैम्पियन नहीं रहे।

इस बीच, मैग्नस बची हुई मोहरों को देखकर खुद को यह महसूस करा रहे थे कि वे अब विश्व चैम्पियन हैं। आनंद इतिहास में दूसरे ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने स्पर्धा में एक भी गेम जीते बिना खिताब गंवा दिया है। इससे पहले वर्ष 2000 में गैरी कास्परोव के साथ भी ऐसा ही हुआ था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आनंद ने शिष्टता दिखाई और युवा विश्व चैम्पियन को श्रेय दिया। उन्होंने पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि 'मेरी गलतियां अपने आप नहीं हुई। मैग्नस ने सही समय पर मुझे उकसाने का काम किया। इस पर उन्हें बधाई देना तो बनता है।' दोनों ही खिलाड़ी अलग-अलग कारणों से अपना नाम इतिहास में दर्ज कराने में सफल रहे हैं।

फंडा यह है कि... 

शिष्टता के साथ की गई स्ट्रीट फाइट और हारने पर दिखाई गई शिष्टता, दोनों ही एक योद्धा और जेंटलमैन के गुण माने जाते हैं।  

























स्रोत:  For Being Gentleman Goodness Is Necessary - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 24th November 2013