Wednesday, November 27, 2013

You Will Have To Pay Heavy Price For Excessive Pampering - Management Funda - N Raghuraman - 27th November 2013

ज्यादा प्यार-दुलार की भी कीमत चुकानी पड़ती है

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


समीर 10वीं कक्षा का छात्र है। कोलकाता के बड़े स्कूल में पढ़ता है। अपने परिवार में अकेली संतान और परिवार के हर सदस्य का लाड़ला। उसकी हर ख्वाहिश पूरी हो जाती है। समीर को पिज्जा और बर्गर अच्छे लगते हैं और उसके माता-पिता ने कभी उसे मना नहीं किया। हालात ये हैं कि लंच टाइम की घंटी बजते ही पड़ोस के फूड ज्वाइंट समीर के लिए गरमा-गर्म पिज्जा सप्लाई कर देते हैं। लेकिन चार साल में क्या हुआ? नियमित परीक्षण के दौरान पता चला कि समीर के लिवर में काफी चर्बी जमा हो गई है। ज्यादा फास्ट फूड खाने के कारण उसको यह परेशानी हुई। वह बीमारी के उस चरण में पहुंच चुका है, जहां से लौटना संभव नहीं है। क्या सिर्फ समीर की यह हालत है? नहीं। डायबिटीज अवेयरनेस एंड यू (डीएवाई) नामक संस्था की ओर से एक अध्ययन कराया गया। इसके मुताबिक कोलकाता के कई बच्चे कमजोर लिवर के शिकार हो चुके हैं। उनमें सामान्य से 15 साल पहले ही डायबिटीज जैसी बीमारी होने की भी आशंका है। यही नहीं 12 से 16 साल की उम्र के 12-15 फीसदी बच्चों के लिवर में खतरनाक स्तर तक चर्बी जमा है। इससे उनकी जान को खतरा हो सकता है। 

स्रोत:  You Will Have To Pay Heavy Price For Excessive Pampering - Management Funda By  N Raghuraman - Dainik Bhaskar  27th November 2013

अध्ययन में बताया गया कि इन बच्चों को सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि अगर खाने-पीने की आदतों को नहीं बदला गया, फास्ट फूड के अनियंत्रित प्रयोग पर रोक नहीं लगाई गई तो डायबिटीज के बाद दूसरे नंबर पर लिवर की बीमारियां आम हो जाएंगी अगले 15 साल में। यह अध्ययन कोलकाता के 23 बड़े स्कूलों में किया गया, जिसके नतीजे हर किसी को हैरान कर देने वाले थे।

अध्ययन में शामिल बच्चों में ज्यादातर के ऊपर फास्ट फूड के प्रभाव नजर आ रहे थे। वे मोटापे की बीमारी के शिकार पाए गए। जिन बच्चों के लिवर में चर्बी जमा हो रही थी, वे बाकी बच्चों की तुलना में ज्यादा फास्ट फूड और सॉफ्ट ड्रिंक लेते थे। उनकी शारीरिक सक्रियता (फिजिकल एक्टिविटीज) भी कम पाई गई। दिन में महज 30 मिनट। इन दिनों नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) से पीडि़त ज्यादातर लोगों की उम्र 30 के आसपास पाई जा रही है। लेकिन 10-15 साल पहले इन बीमारियों के शिकार लोग 50 की उम्र के करीब होते थे। ये लिवर की वे बीमारियां हैं जो शराब पीने की वजह से नहीं बल्कि ज्यादा चर्बीयुक्त भोजन करने से होती हैं। इनका शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो इलाज भी संभव है। देर से पता चले तो ये जानलेवा होती हैं। दिक्कत ये है कि एनएएफएलडी का पता ज्यादातर मामलों में आखिरी स्टेज में चलता है। अध्ययन के मुताबिक इन बीमारियों का पता भले देर से चल पा रहा हो, लेकिन ये युवावस्था में ही घर बनाना शुरू कर देती हैं। लिहाजा, सचेत रहने की जरूरत है।

तो क्या करना चाहिए? अगर आपका वजन अचानक ज्यादा बढ़ गया है, तो तुरंत चेक कराएं। क्योंकि यही सबसे पहली और अहम वजह है, जो बताती है कि शरीर में कहीं चर्बी ज्यादा जमा हो रही है। इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुरूप खान-पान और जीवनशैली अपना लेना चाहिए। इस जगह लापरवाही की तो यह आगे चलकर भारी पड़ सकती है, क्योंकि लिवर की बीमारी से ब्लड शुगर, दिल की बीमारियां, मोटापा जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। ये सब एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। छह से आठ साल के बच्चों के लिवर में चर्बी जमा होने की बीमारी 10 साल पहले आम नहीं थी। तब इक्का-दुक्का केस सामने आते थे। ये खबर का विषय होते थे, लेकिन अब चिंता का विषय हैं।

फंडा यह है कि

बहुत ज्यादा प्यार-दुलार भी परेशानी का कारण बन जाता है। इशारा साफ है। अगर बच्चा इकलौता है तो इसका मतलब ये नहीं होना चाहिए कि उसे आप जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार करें। 

 

 

 




























स्रोत:  You Will Have To Pay Heavy Price For Excessive Pampering - Management Funda By  N Raghuraman - Dainik Bhaskar  27th November 2013