Thursday, November 28, 2013

Obstacles Can't Stop You, If You Have A Winning Habit - Management Funda - N Raghuraman - 28th November 2013

जीतने की आदत है तो बाधाएं रोक नहीं सकतीं

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन 


उसे पहली बार भारत के राष्ट्रपति ने नेशनल अवॉर्ड दिया। कुछ समय ही बीता कि दूसरी बार उन्हीं राष्ट्रपति के हाथ से अगले नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित होने का मौका मिल गया। उसे उसकी नई खोज के लिए अवॉर्ड मिले थे। इसके बाद राष्ट्रपति बदले लेकिन नेशनल अवॉर्ड लेने की उसकी आदत नहीं बदली। अगले महीने यानी दिसंबर में उसे चौथा नेशनल अवॉर्ड मिलने वाला है। तकनीक और इससे जुड़े उपकरण आए दिन तो सस्ते नहीं होते, लेकिन बेंगलुरू के आरएस हिरेमथ के लिए यह बाएं हाथ का काम है। वे गरीबों के लिए लगातार नए और सस्ते उपकरण विकसित कर रहे हैं। उनका ताजा आविष्कार है- सौर ऊर्जा से चलने वाली कान की मशीन का चार्जर। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से चौथा नेशनल अवॉर्ड मिलने वाला है। 

स्रोत : Obstacles Can't Stop You, If You Have A Winning Habit - Management Funda - N Raghuraman - दैनिक भास्कर 28th November 2013  

हिरेमथ ने कर्नाटक के बीजापुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। लेकिन नौकरी के लिए नहीं। वे हमेशा नई तकनीक और उपकरणों का आविष्कार करना चाहते थे। इसी का नतीजा था कि उन्होंने सबसे पहले सौर ऊर्जा से चलने वाली कान की मशीन बनाई। यह कान की मशीन हिट हो गई। अब तक 1.30 करोड़ यूनिट बेची जा चुकी हैं। गांवों से खासकर, स्कूल जाने वाली युवा लड़कियों से उन्हें लगातार सकारात्मक फीड बैक मिला।

इस मशीन ने हिरेमथ को पहला नेशनल अवॉर्ड दिलाया। सरकार ने भी इस उपकरण को जरूरतमंदों में बंटवाना शुरू कर दिया। लेकिन इसकी बैटरी को चार्ज करना महंगा पड़ रहा था। इस मशीन में हर सप्ताह बैटरी बदलनी पड़ती थी। जिससे उपयोग करने वाले पर सालाना करीब 1,440 रुपए का बोझ पड़ता। यह देखते हुए हिरेमथ ने सौर ऊर्जा वाला चार्जर बना दिया। चार्जर की कीमत रखी 1,300 रुपए। इसके साथ दो चार्जेबल बैटरियां भी मुफ्त। ये बैटरियां ऐसीं कि इन्हें छह साल तक बदलने की जरूरत न पड़े। इस तरह कान की मशीन इस्तेमाल करने वालों पर सालाना बोझ घटकर महज 216 रुपए रह गया। चार महीने पहले उन्होंने यह आविष्कार किया। इसके लिए आर्टिफिशियल लिंब मैन्यूफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलिमको) ने उन्हें प्रमाणपत्र दिया है। एलिमको के चेयरमैन जी. नारायण राव के मुताबिक हिरेमथ का बनाया चार्जर स्विस कंपनियों के बनाए उपकरण से भी बेहतर है।

हिरेमथ को दूसरा नेशनल अवॉर्ड एक टॉकिंग टैक्टाइल मैप बनाने के लिए मिला था। यह उपकरण उन लोगों की मदद के लिए है, जो देख नहीं सकते। उपकरण इन लोगों को अकेले ही किसी भवन की सीढिय़ां वगैरह चढऩे में सक्षम बनाता है। उन्हें सीढिय़ों/ एलीवेटर आदि की दिशा बताता है। साथ ही सड़क पार करने में मदद करता है। तीसरा नेशनल अवॉर्ड हिरेमथ को उनके ई-चरखा के लिए मिला। उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान देखा कि गुजरात में कच्छ के कई गांवों में बिजली नहीं है। लिहाजा, उन्होंने इस इलाके के ग्रामीणों की मदद के लिए ऐसा चरखा बनाया, जिससे सूत कातने के साथ बिजली भी पैदा की जा सके। कम से घर में एकाध बल्ब जलने लायक बिजली तो बन ही जाए। और इसमें भी वे सफल रहे। हिरेमथ को जब उनके अविष्कार के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड मिला तो कई बड़ी कंपनियों ने उन्हें जॉब ऑफर की। भारी-भरकम पैकेज का लालच दिया। लेेकिन उन्होंने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए। उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें अपना ज्ञान गरीबों की मदद के लिए ही लगाना है। और यही वे कर भी रहे हैं। उन्होंने अपनी कामयाबी के लिए जो न्यूनतम बेंचमार्क तय किया है, वह है नेशनल अवॉर्ड।  

फंडा यह है कि  …

जीतना एक आदत होती है। कोई मौके-बे-मौके मिलने वाली चीज नहीं। अगर आपने अपने भीतर यह आदत डाल ली है तो कोई बाधा आपको रोक नहीं सकती। 



































स्रोत : Obstacles Can't Stop You, If You Have A Winning Habit - Management Funda - N Raghuraman - दैनिक भास्कर 28th November 2013