Saturday, January 25, 2014

Good Results Are Achieved By Doing Good - Management Funda - N Raghuraman - 25th January 2014

अच्छा काम करने से नतीजे भी अच्छे मिलते हैं

 

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन



बॉलीवुड के ग्लैमर के अलावा मुंबई महानगर कई और चीजों के लिए जाना जाता है। इनमें से एक हैं डिब्बेवाले। इन पर देश के आईआईएम से लेकर लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स ने काफी काम किया है। डिब्बेवालों की तरह ही एक और बड़ी वर्कफोर्स है। जो मुंबई के रेलवे स्टेशनों पर दिखाई पड़ती है। अलग पहचान वाले ये लोग बूट पॉलिश करते हैं। करीब एक हजार की संख्या वाले ये लोग नीली वर्दी में चर्चगेट से विरार और सीएसटी से कल्याण तक रेलवे स्टेशनों पर मिल जाएंगे। बूट पॉलिश करके ये हर दिन 100 से 200 रुपए तक कमा लेते हैं। इसके लिए ये सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे को 236 रुपए हर महीने लाइसेंस फीस के रूप में चुकाते हैं। साल 1961 में रेल मंत्री जगजीवन राम ने रेलवे स्टेशनों पर बूट पॉलिश करने वालों को अपने छोटे-छोटे बॉक्स नुमा स्टैंड लगाने की मंजूरी दी थी। इनमें से कई बूट पॉलिश वालों को मैं खुद जानता हूं जिनके बच्चे विदेशों और मुंबई के बड़े अस्पतालों में डॉक्टर हैं। बावजूद इसके यह लोग अपना काम नहीं छोडऩा चाहते। इनका मानना है कि यह काम ही इनकी जिंदगी की नींव है। 

Source: Good Results Are Achieved By Doing Good - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 25th January 2014

बगैर किसी परेशानी के चल रहे इन लोगों के काम में साल 2007-08 में बड़ी अड़चन आ खड़ी हुई। सेंट्रल रेलवे ने प्लेटफॉर्मों पर बूट पॉलिश स्टॉल के निजीकरण का फैसला किया । बूट पॉलिश वालों ने इसका विरोध किया। इसके बाद यह लोग हड़ताल पर चले गए। लोगों का सहयोग न मिलने और रेलवे बोर्ड में कोई पकड़ न हो पाने के कारण इनके विरोध को झटका भी लगा। उस वक्त आम आदमी पार्टी के विचारक योगेंद्र यादव इनकी मदद के लिए आगे आए। योगेंद्र ने बूट पॉलिश वालों का संगठन खड़ा करने में मदद की। संगठन अपने प्रतिनिधि चुने। इसका नतीजा बूट पॉलिश कामगार संघ समिति के तौर पर निकला। यादव की मदद से इन लोगों ने 10 अलग-अलग यूनियन बनाई।

इसके बाद योगेंद्र इनको तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव के पास ले गए। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का लंबा दौर चला। नतीजा यह निकला कि रेलवे ने निजी बूट पॉलिश स्टॉल लगाने की योजना को रद्द कर दिया। इस दौरान योगेंद्र ने बूट पॉलिश करने वालों के लिए पॉलिसी का ड्राफ्ट भी तैयार किया। इसमें तय किया गया कि बूट पॉलिश वाले रेलवे को लाइसेंस फीस चुकाएंगे। इस फीस में हर साल छह फीसदी की बढ़ोतरी की जाएगी। इसके बाद सात महीने से चला आ रहा अनिश्चितता का दौर खत्म हुआ। बूट पॉलिश वालों की जिंदगी दोबारा पटरी पर लौट आई। छह साल पहले योगेंद्र यादव द्वारा की गई मदद के एवज में अब इन लोगों ने तय किया है कि अगले चार महीनों यानी लोकसभा चुनाव तक 12 घंटे के बजाय सिर्फ आठ घंटे ही काम करेंगे। बाकी के चार घंटे पार्टी के कामों के लिए देंगे। शुरुआती महीनों में यह लोग पार्टी के सदस्यता अभियान में मदद देंगे। फिर उसके बाद पार्टी के प्रचार में जुटेंगे। अहम बात यह है कि बूट पॉलिश वालों की मुंबई के रेलवे स्टेशनों के आस-पास वाले इलाकों में खासी पकड़ है। बूट पॉलिश कामगार संघ समिति ने चर्चगेट और सीएसटी जैसे बड़े स्टेशनों पर अपना अभियान शुरू भी कर दिया है। यहां ये आम आदमी लोग पार्टी के प्रति लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं। इनका मानना है कि पार्टी ने महंगाई और भ्रष्टाचार को खत्म करने का वादा किया है। यह दोनों ही मुद्दे गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। ऐसे में सिर्फ चार घंटे पार्टी को देना कोई बड़ी बात नहीं है। इस कॉलम का किसी राजनीतिक पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। हम सिर्फ इस उदाहरण से लोगों के नजरिये और उनकी चिंताओं की बात कर रहे हैं। 




Source: Good Results Are Achieved By Doing Good - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 25th January 2014