Monday, January 13, 2014

Portfolio Career - A Good Alternate Career - Management Funda - N Raghuraman - 13th January 2014

पोर्टफोलियो कॅरिअर एक बेहतर विकल्प हो सकता है

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन

कुछ साल पहले जीतेंद्र यादव बिहार से मुंबई आए। उस वक्त उनके खेतों में फसल खराब हो चुकी थी। नौकरी की तलाश थी। मुंबई में पहले से उनके कुछ संपर्क थे। उसके जरिए फायदा मिला। उन्हें शहर में आते ही चौकीदार की नौकरी मिल गई। परिवार के बाकी सदस्य अब पूरी तरह जीतेंद्र की नौकरी से होने वाली कमाई पर निर्भर थे। इस एक कमाई से सबका खर्च चलाना मुश्किल था। इसलिए जीतेंद्र ने दिन के समय में एक नौकरी कर ली। एशियन पेंट्स में वे ठेके पर पेंटिंग का काम करने लगे। इस बीच परिवार के कुछ और सदस्यों को भी नौकरी मिल गई। वे भी मुंबई आ गए। लेकिन जीतेंद्र अपने दोनों काम करते रहे। बल्कि कुछ और काम उन्होंने हाथ में ले लिए थे। इससे उन्हें अतिरिक्त कमाई हो रही थी। एक व्यक्ति कमाई के लिए जब इस तरह कई काम करता है तो इसे पोर्टफोलियो कॅरिअर कहा जाता है। और ऐसे काम करने वाले को पोर्टफोलियो कॅरियरिस्ट। इस तरह का व्यक्ति कभी पूरे समय बंध कर एक नौकरी नहीं करता। भारत में यह चलन अभी ज्यादा पुराना नहीं है। 

Source: Portfolio Career - A Good Alternate Career - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 13th January 2014


अब चेन्नई के विनीत एम. बेन्नी को ही ले लीजिए। सिर्फ 21 साल की उम्र है इनकी। एक स्कूल चलाते हैं। इनकी डिजाइन एंट कंटेंट क्रिएशन फर्म भी है। 'द टेररिज्म' नाम से एक बैंड में परफॉर्म करते हैं। डेजर्ट सफारी नामक रेस्तरां के मालिक भी हैं। विनीत को रोज चारों जगहों पर अलग-अलग अंदाज में देखा जा सकता है। इतिहास में झांकें तो पोर्टफोलिए करियरिस्ट का सबसे बढिय़ा उदाहरण हैं लियोनार्दो द विंसी। एक साथ वे न जाने कितनी विधाओं में पारंगत थे। पेंटर, मूर्तिकार, शिल्पकार, संगीतकार, गणितज्ञ, इंजीनियर, 
आविष्कारक, लेखक, भूगर्भशास्त्री, नक्शानवीस। हर विधा में खास थे लियोनार्दो। पोर्टफोलियो करियरिस्ट ऐसे ही होते हैं। आम नहीं होते। अपवाद होते हैं। 

अगर आप ऐसे होना चाहते हैं तो आपको भी आवश्यक रूप से अपवाद होना पड़ेगा। पोर्टफोलियो करियरिस्ट और फ्रीलांसर में फर्क होता है। फ्रीलांसर एक क्षेत्र विशेष में अलग-अलग काम कर सकता है। लेकिन पोर्टफोलियो करियरिस्ट अलग-अलग क्षेत्रों में पारंगत होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आजकल लोग किसी एक बॉक्स में फिट होकर नहीं रहते। उनमें विभिन्न कौशल होते हैं। उनके भीतर रुचियां भी कई होती हैं। वे मल्टीटास्कर होते हैं। मतलब एक साथ कई काम करने में सक्षम। करने वाले भी। विशेषज्ञों का दावा है कि पोर्टफोलियो करियरिस्ट होने की तरफ यह पहला कदम होता है। 

पोर्टफोलियो कॅरिअर आपको अपना कॅरिअर अपनी तरह डिजाइन करने का मौका देता है। देश में ही नहीं दुनिया में फुल टाइम जॉब की कमी हो रही है। ऐसे में पोर्टफोलियो कॅरिअर बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें व्यक्ति अलग-अलग क्षेत्रों में पार्ट टाइम जॉब कर सकता है। इससे उसे फुल टाइम जॉब से ज्यादा आमदनी हो सकती है। खुद के लिए भी पर्याप्त समय मिलता है। नए-नवेले पेशेवरों का रुझान इस तरफ ज्यादा है। वे इसे गंभीरता से ले रहे हैं। अपने पोर्टफोलियो में अलग-अलग कॅरिअर जोड़ते जा रहे हैं। अगर आप आजादी और विविधता पसंद करते हैं। नई चीजें सीखना चाहते हैं। नई चुनौतियां लेना चाहते हैं। परिवर्तन का आनंद लेना चाहते हैं। अपने हर कौशल को शक्ति बनाना चाहते हैं। तब ऐसे में पोर्टफोलियो कॅरिअर की ओर रुख किया जा सकता है। इसके लिए दो-तीन गुण बेहद आवश्यक हैं। ऐसा करने वाले को सेल्फ स्टार्टर होना चाहिए। यानी किसी काम के लिए खुद पहल करने वाला। उसका टाइम मैनेजमेंट अच्छा होना चाहिए। सभी तरह के हालात को स्वीकार करने वाला हो। और पूरी तरह संगठित हो।

फंडा यह है कि...


पोर्टफोलियो कॅरिअर आपको प्रयोग करने की छूट देता है। सर्वश्रेष्ठ को स्वीकार करने का मौका देता है। खराब को छोड़ सकने का विकल्प देता है। और सबसे बड़ी बात काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन स्थापित करता है। 

 

 

































Source: Portfolio Career - A Good Alternate Career - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 13th January 2014