Saturday, December 14, 2013

Schematic Agriculture May Overtake Industries - Management Funda - N Raghuraman - 14th December 2013

उद्योगों को पीछे छोड़ सकती है योजनाबद्ध खेती-बाड़ी

मैनेजमेंट फंडा - एन. रघुरामन


कुछ महीने पहले राम चरण नई कार खरीदने की योजना बना रहे थे। जबकि ओमप्रकाश जयपुर में घर खरीदने और कंचन सिंह बेटी की शादी की तैयारी में थे। ये तीनों किसान हैं। दो राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गोदूवाली धानी गांव के हैं और एक जोधपुर के। ये तीन सिर्फ एक उदाहरण हैं यह बताने के लिए किसान समृद्ध हो रहा है। राजस्थान की ही बात करें तो वहां ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ रही है। एशियन पेंट्स बड़ी मात्रा में पेंट्स बेच रही है, क्योंकि किसानों के नए घर बन रहे हैं। टाइल्स निर्माता लगातार इस क्षेत्र में अपने उत्पादों की आपूर्ति करने में लगे हैं। क्षेत्रफल के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान गुआर फली के उत्पादन के मामले में दुनिया में नंबर एक है। 

Source: Schematic Agriculture May Overtake Industries - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 14th December 2013


गुआर फली का इस्तेमाल आइसक्रीम बनाने में होता है। टोमैटो कैचअप में भी इसका उपयोग किया जाता है। यह फसल राज्य में किसानों के लिए बड़े फायदे का सौदा साबित हो रही है। निर्यात के मामले में इसने ज्वैलरी बिजनेस को भी पीछे छोड़ दिया है। राजस्थान ही नहीं, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ के किसान भी गुआर फली बड़ी तादाद में उगा रहे हैं। अमेरिकी तेल कंपनियों में गुआर फली की काफी मांग है। एक अनुमान के मुताबिक देश से इस फसल का निर्यात करीब तीन अरब डॉलर (करीब 18,637 करोड़ रु.) तक है। पाकिस्तान के किसानों ने भी 2010 में करीब 2.9 करोड़ डॉलर (लगभग 180 करोड़ रु.) की गुआर फली की फसल का निर्यात किया। 2013 में उनका यह निर्यात बढ़कर 17.5 करोड़ डॉलर (करीब 1,087 करोड़ रु.) हो गया। 

उत्पादन बढऩे के बाद भी इसकी कीमतें एक समान बनी हुई हैं। इसकी कीमतों को अब तक प्याज की तरह तीन अंकों में पहुंचने का सौभाग्य नहीं मिला है, क्योंकि जितनी इसकी मांग है उसके हिसाब से आपूर्ति बनी हुई है। अमेरिकी कंपनी है-गुआर ग्लोबल लिमिटेड। इसके प्रतिनिधि अक्सर जोधपुर और राजस्थान के अन्य हिस्सों की यात्रा पर आते रहते हैं। यहां के किसानों को यह बताने के लिए बेहतर और ज्यादा फसल कैसे ली जा सकती है। कुछ समय पहले तक गुआर फली जानवरों को खिला दी जाती थी। लेकिन तभी किसी को आइडिया आया कि गुआर फली का इस्तेमाल तेल खनन में हो सकता है। तेल के कुओं में ड्रिलिंग के वक्त फ्लूड के तौर पर। टूथपेस्ट, दही, टोमैटो कैचअप व आइसक्रीम में भी इसका इस्तेमाल होने लगा। और बस इस फसल की अहमियत बढ़ गई। आज राजस्थान के किसानों को इसके उत्पादन के मामले में दूसरे राज्यों से प्रतिस्पर्धा भी मिलने लगी है। हालांकि इसके बावजूद इस राज्य की दुनिया में कुल गुआर फली उत्पादन में तीन चौथाई हिस्सेदारी है। 

अब सवाल ये है कि राजस्थान के किसानों ने किस तरह यह उपलब्धि हासिल की? इसका जवाब यह है कि इनका आपसी संपर्क बड़ा जीवंत है। एक फोन, एक कम्प्यूटर और इसके जरिए हर संबंधित कोने से सतत संपर्क ने इन्हें प्रतिस्पर्धा में आगे लाकर खड़ा कर दिया। गुआर फली की कीमतें एक सी हैं तब भी इन किसानों को चिंता नहीं है, क्योंकि इन्हें पता है कि दुनिया में अगली बार किस चीज की ज्यादा मांग हो सकती है। यह प्याज, कपास, कोई फल या मक्का भी हो सकती है। वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े रहना जानते हैं। उसी के हिसाब से आगे बढ़ते हैं। किसी दूसरे उद्योग को देखें तो उसे स्थापित होने में कम से कम एक-दो साल लग जाते हैं। इतना समय मशीनों की स्थापना और अन्य जरूरी निर्माण कार्यों में लग जाता है। लेकिन खेती-बाड़ी के मामले में ऐसा नहीं है। उन्हें सिर्फ यह पता लगाना होता है कि किस फसल की बाजार में मांग है। उसकी कितनी कीमत मिल सकती है। और बस वे उसे अगले छह महीने में हासिल कर सकते हैं। राजस्थान के किसानों ने यह कर दिखाया है। यहां तक कि उनके पास अगले तीन साल का ब्लू प्रिंट तैयार है। इसके हिसाब से वे अपने कृषि उत्पादन को आगे ले जाने वाले हैं।

फंडा यह है कि...

जब किसान खेती-बाड़ी में औद्योगिक प्रक्रिया को अपना लेते हैं तो यह भी फायदे का कारोबार साबित हो जाती है। उद्योग-धंधों से भी ज्यादा।


 















Source: Schematic Agriculture May Overtake Industries - Management Funda By N Raghuraman - Dainik Bhaskar 14th December 2013